|| कबीर के दोहे (भाग-3)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||


कबीर अमृतवाणी || कबीर के दोहे (भाग-3)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || Hindi Lyrics Mp3 Download

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|| कबीर के दोहे (भाग-3)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||

Title : || कबीर के दोहे (भाग-3)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||
Category Name: Lord Shiv Bhajan
Author Name: बिरेन्द्र भारती
Publishing Year: 2022-01-13 11:52:52
Music Lenth: 00:15:33 Min
Size: 7 MB
Downloads> :MP3 (Android)|M4A (Apple)| Download Video

Songs Info : This is very beautiful bhajan || कबीर के दोहे (भाग-3)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || that will hear you become more energized many such Bhajan are available in Bhaktigaane, listen to yourself and also tell others and share them together to help us

Songs Info :बहुत ही सुन्दर भजन हैं जिसे सुनकर आप भाव विभोर हो जायेंगे ऐसे ही बहुत सारे भजनो का संग्रह हैं भक्तिगाने में मिलेगा , खुद भी सुने और दुसरो को भी सुनाये और साथ में शेयर कर हमें सहयोग प्रदान करे

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|| कबीर के 10 दोहे || Kabeer Ke 10 Dohe || कबीर अमृितवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || Birendra Bharti ||

|| कबीर के दोहे (भाग-3)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||

[21]
करता था सो क्यों रहा,अब करी क्यों पछताय ।
बोया पेड़ बबुल का, अमुआ कहा से पाये ।।

[22]
कस्तूरी कुंडल बसे,मृग ढूँढत बन माही।
ज्योज्यो घट– घट राम है,दुनिया देखें नाही ।।

[23]
तू तू करता तू भया ,मुझमे रही न हूँ ।
वारि तेरे नाम पर, जित देखूं तित तू ।।

[24]
जिन खोज तिन पाइए , गहरे पानी पैठ ।
मै बपुरा बूडन डरा , रहा किनारे बैठ ।।

[25]
तिनका कबहु ना निंदिये ,जो पावन तले होय ।
कभू उड़ी आँखिन पड़े, तो पीर घनेरी होय ।।

[26]
साई इतना दीजिये तामें कुटुम समाये ।
मै भी भूखा न रहूँ ,साधु न भूखा जाये ।।

[27]
बुरा जो देखन मैं चला, बुरा न मिलया कोय ।
जो दिल खोजा आपना, मुझसे बुरा न कोय ।।

[28]
पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय |
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय।|

[29]
दोस पराए देखि करि, चला हसन्त हसन्त|
अपने याद न आवई, जिनका आदि न अंत||

[30]
दुर्लभ मानुष जन्म है, देह न बारम्बार,
तरुवर ज्यों पत्ता झड़े, बहुरि न लागे डार||


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