|| कबीर के दोहे (भाग-5)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||


कबीर अमृतवाणी || कबीर के दोहे (भाग-5)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || Hindi Lyrics Mp3 Download

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|| कबीर के दोहे (भाग-5)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||

Title : || कबीर के दोहे (भाग-5)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती ||
Category Name: Lord Shiv Bhajan
Author Name: बिरेन्द्र भारती
Publishing Year: 2022-01-15 10:25:03
Music Lenth: 00:15:46 Min
Size: 7 MB
Downloads> :MP3 (Android)|M4A (Apple)| Download Video

Songs Info : This is very beautiful bhajan || कबीर के दोहे (भाग-5)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || that will hear you become more energized many such Bhajan are available in Bhaktigaane, listen to yourself and also tell others and share them together to help us

Songs Info :बहुत ही सुन्दर भजन हैं जिसे सुनकर आप भाव विभोर हो जायेंगे ऐसे ही बहुत सारे भजनो का संग्रह हैं भक्तिगाने में मिलेगा , खुद भी सुने और दुसरो को भी सुनाये और साथ में शेयर कर हमें सहयोग प्रदान करे

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|| कबीर के 10 दोहे || Kabeer Ke 10 Dohe || कबीर अमृितवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || Birendra Bharti ||

|| कबीर के दोहे (भाग-5)|| Kabeer Ke Dohe || कबीर अमृतवाणी ||Kabeer Amreetwani || बिरेन्द्र भारती || Birendra Bharti ||

[41]
सातों सबद जू बाजते घरि घरि होते राग ।
ते मंदिर खाली परे बैसन लागे काग ॥

[42]
कबीर यह तनु जात है सकै तो लेहू बहोरि ।
नंगे हाथूं ते गए जिनके लाख करोडि॥

[43]
हू तन तो सब बन भया करम भए कुहांडि ।
आप आप कूँ काटि है, कहै कबीर बिचारि॥

[44]
तेरा संगी कोई नहीं सब स्वारथ बंधी लोइ ।
मन परतीति न उपजै, जीव बेसास न होइ ॥

[45]
झूठे को झूठा मिले, दूंणा बंधे सनेह|
झूठे को साँचा मिले तब ही टूटे नेह ॥

[46]
मूरख संग न कीजिए ,लोहा जल न तिराई।
कदली सीप भावनग मुख, एक बूँद तिहूँ भाई॥

[47]
ऊंचे कुल क्या जनमिया जे करनी ऊंच न होय।
सुबरन कलस सुरा भरा साधू निन्दै सोय ॥

[48]
कबीर संगति साध की , कड़े न निर्फल होई ।
चन्दन होसी बावना , नीब न कहसी कोई ॥

[49]
जानि बूझि साँचहि तजै, करै झूठ सूं नेह ।
ताकी संगति रामजी, सुपिनै ही जिनि देहु ॥

[50]
जल में कुम्भ कुम्भ में जल है बाहर भीतर पानी।
फूटा कुम्भ जल जलहि समाना यह तथ कह्यौ गयानी॥


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