ज्ञान कोष – Knowledge Power Park

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भगवान शिव के अर्धनारीश्वररूप का आध्यात्मिक रहस्य

भगवान शिव के अर्धनारीश्वररूप का आध्यात्मिक रहस्य

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bhagavaan shiv ke ardhanaareeshvararoop ka aadhyaatmik rahasy भगवान शिव का अर्धनारीश्वररूप जगत्पिता और जगन्माता के सम्बन्ध को दर्शाता है। सत्-चित् और आनन्द–ईश्वर के तीन रूप हैं। इनमें सत्स्वरूप उनका मातृस्वरूप है, चित्स्वरूप उनका पितृस्वरूप है और उनके आनन्दस्वरूप के दर्शन अर्धनारीश्वररूप में ही होते हैं, जब शिव और शक्ति दोनों मिलकर पूर्णतया एक हो जाते हैं। सृष्टि के समय परम पुरुष अपने ही वामांग से प्रकृति को निकालकर उसमें समस्त सृष्टि की उत्पत्ति करते हैं। शिव गृहस्थों के ईश्वर और विवाहित दम्पत्तियों के उपास्य देव हैं क्योंकि अर्धनारीश्वर शिव स्त्री और पुरुष की पूर्ण एकता की अभिव्यक्ति हैं। संसार की सारी विषमताओं से घिरे रहने पर भी अपने मन को शान्त व स्थिर बनाये रखना ही योग है। भगवान शिव अपने पारिवारिक सम्बन्धों से हमें इसी योग की शिक्षा देते हैं। अपनी धर्मपत्नी के साथ पूर्ण एकात्मकता ...
क्या परमेश्वर है ? क्या परमेश्वर का अस्तित्व हैं

क्या परमेश्वर है ? क्या परमेश्वर का अस्तित्व हैं

ज्ञान कोष - Knowledge Power Park, यीशु हिंदी भजन लिरिक्स - yeshu Hindi Bhajan Lyrics
क्या परमेश्वर है? यहाँ ऐसे कारण दिए जा रहे हैं जो यह विश्वास दिलाते हैं कि परमेश्वर है । Is god exist? Here are reasons that convince the God Exist. क्या एक बार आप यह नहीं चाहेंगे की आपको सरल तरीक़े से परमेश्वर के अस्तित्व का प्रमाण मिल जाए? ज़बरदस्ती, या किसी के भय में आकर नहीं, परंतु सीधा साधा प्रमाण जिस पर आप विश्वास कर ले? यहाँ, यहाँ, कुछ ऐसे कारणों को देने का प्रयास किया जा रहा है जो यह दर्शाता है कि परमेश्वर है। मेरिलिन एडमसन द्वारा लिखित : सबसे पहले, इस पर विचार कीजिए- जब बात परमेश्वर के अस्तित्व की होती है, कुछ ऐसे लोग हैं जिन्हें परमेश्वर के अस्तित्व के पर्याप्त प्रमाण मिले पर उन्होंने परमेश्वर की सच्चाइयों को लोगों से छिपा कर रखा इसलिये कि, ‘‘परमेश्वर के विषय का ज्ञान उन के मनों में प्रगट है, क्योंकि परमेश्वर ने उन पर प्रगट किया है।‘’1 दूसरी तरफ वे लोग हैं जो परमेश्वर ...
प्राचीन या पौराणिक काल में रक्षा बंधन की राखी को क्या कहते थे

प्राचीन या पौराणिक काल में रक्षा बंधन की राखी को क्या कहते थे

ज्ञान कोष - Knowledge Power Park, व्रत और त्यौहार - Fast and Festivals
भाई बहन के त्योहार रक्षा बंधन पर इस संबंध में 5 खास बातें हैं जो राखी बांधी जाती है उसका नाम रखी कब रखा गया और राखी के पहले प्राचीन या पौराणिक काल में उसे क्या कहते थे। आओ जानते है 1. कहते हैं कि राक्ष को पहले 'रक्षा सूत्र' कहते थे। यह रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा वैदिक काल से रही है जबकि व्यक्ति को यज्ञ, युद्ध, आखेट, नए संकल्प और धार्मिक अनुष्ठान के दौरान कलाई पर नाड़ा या सू‍त का धागा जिसे 'कलावा' या 'मौली' कहते हैं- बांधा जाता था। 2. यही रक्षा सूत्र आगे चलकर पति-पत्नी, मां-बेटे और फिर भाई-बहन के प्यार का प्रतीक बन गया। रक्षा बंधन के अलावा भी अन्य कई धार्मिक मौकों पर आज भी रक्षा सूत्र (नाड़ा) बांधा जाता है। 3. रक्षा सूत्र को बोलचाल की भाषा में राखी कहा जाता है जो वेद के संस्कृत शब्द 'रक्षिका' का अपभ्रंश है। मध्यकाल में इसे राखी कहा जाने लगा। 4. भाई-बहन के इस पवित्र त्योहार को ...
शिव तांडव स्त्रोत क्या हैं अर्थ कहानी और लाभ सम्पूर्ण जानकारी | What is Shiv Tandava Strotam

शिव तांडव स्त्रोत क्या हैं अर्थ कहानी और लाभ सम्पूर्ण जानकारी | What is Shiv Tandava Strotam

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शिव तांडव स्तोत्रम Shiv Tandava Strotam वैसे तो भगवान् शिव को सभी जानते हैं और ऐसा कोई नहीं जो इनके नाम से परिचित न हो चाहे वो किसी भी धर्म या संस्था का ही क्यों न हो . हम बात करते हैं शिव तांडव स्त्रोत की . शिव तांडव स्तोत्रम भगवान शिव की स्तुति में रावण द्वारा लिखा और गाया गया एक भजन है। शिव तांडव स्तोत्रम भगवान शिव के लौकिक नृत्य का प्रतिनिधित्व करता है जो सभी नकारात्मक ऊर्जाओं को समाप्त करता है। भजन में 16 छंद शामिल हैं और प्रत्येक छंद में निर्भय शिव और उनकी अनन्त सुंदरता का विस्तार से वर्णन किया गया है। वह भगवान शिव के उत्साही भक्तों में से एक थे। शिव तांडव स्तोत्रम को रावण ने सदियों पहले लिखा था। भगवान राम की पत्नी सीता का अपहरण करने के लिए महाकाव्य रामायण में रावण लोकप्रिय है। रावण के अहंकारी, अहंकारी पक्ष को सबसे अधिक जानते हैं, लेकिन मुट्ठी भर लोग भगवान शिव की भक्ति के बार...
Hast Rekha Jyotish रेखाए भाग्य के बारे में काफी कुछ बता देती है।

Hast Rekha Jyotish रेखाए भाग्य के बारे में काफी कुछ बता देती है।

ज्ञान कोष - Knowledge Power Park, हस्त रेखा - Palm Astrology Reading
हस्त रेखा ज्ञान Palmistry (Hast Rekha Gyan) In Hindi Hast Rekha Gyan In Hindi – हमारे हाथ की रेखाएं बताती है की आप भाग्यशाली है या नहीं। इन रेखाओं का संबंध व्यक्ति की जीवन में होने वाली तमाम घटनाओं से जुड़ा होता है। हमारी हथेली में जीवन रेखा, हृदय रेखा, विवाह रेखा, और भी बहुत सी रेखाएं बनी होती है। आज हम हस्त रेखा ज्ञान के माध्यम से जानेंगे की हमारे हाथ में मुख्य रेखाएं कौन-कौन सी होती है। इन रेखाओं के माध्यम से व्यक्ति के भाग्य के बारे में काफी कुछ पता चल जाता है।हाथ की लकीरें हमारे जीवन के बारे में काफी कुछ बताती है। हाथो की लकीरें भी समय समय पर बदल जाती है और हमें बताती है की हमारे जीवन में कैसे कैसे बदलाव आ रहे है। हस्तशास्त्र में हाथ की लकीरों की व्याख्या की गयी है। लेकिन हम हाथ की हर लकीर को तो नहीं पढ़ सकते क्योकि उसके लिए हमे पूर्ण हस्तशास्त्र का ज्ञान पड़ना होगा। लेकिन हाथो की कई...
(Shiv Puran) शिव पुराण की 10 बातें अगर आपने जान ली तो होगी बहुत तरक्की

(Shiv Puran) शिव पुराण की 10 बातें अगर आपने जान ली तो होगी बहुत तरक्की

ज्ञान कोष - Knowledge Power Park, हिंदी भजन लिरिक्स - New Hindi Bhajan Lyrics
शिव पुराण (Shiv Puran) का संबंध भगवान शिव और उनके अवतारों से हैं। इसमें शिव भक्ति, शिव महिमा और शिवजी के संपूर्ण जीवन चरित्र पर प्रकाश डाला गया है। साथ ही इसमें ज्ञान, मोक्ष, व्रत, तप, जप आदि के फल की महिमा का वर्णन भी मिलता है। हालांकि शिव पुराण (Shiv Puran) में हजारों ज्ञान और ‍भक्ति की बातें हैं लेकिन हमने मात्र 10 को ही अपनी भाषा में लिखा है। Shiv Puraan Ki 10 Baate jo Aapki Kismat Badal Sakti Hain    1. धन संग्रह : अच्छे मार्ग से धन संग्रहित करें और संग्रहित धन के तीन भाग करके एक भाग धन वृद्धि में, एक भाग उपभोग में और एक भाग धर्म-कर्म में व्यय करें। इससे जीवन में सफलता मिलती है। 2. क्रोध का त्याग : क्रोध कभी नहीं करना चाहिए और न ही क्रोध उत्पन्न करने वाले वचन बोलने चाहिए। क्रोध से विवेक नष्ट हो जाता है और विवेक के नष्ट होने से जीवन में कई संकट खड़े हो जाते हैं। 3. भोजन...
रुद्राक्ष का धार्मिक महत्त्व

रुद्राक्ष का धार्मिक महत्त्व

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शिवपुराण, लिंगपुराण, एवं सकन्द्पुराण आदि में इस का विशेष रूप से वर्णन किया हुआ है। ऐसा विश्वास है कि रुद्राक्ष का स्पर्श, दर्शन, उस पर जप करने से, उस की माला को धारण करने से समस्त पापों का और विघ्नों का नाश होता है। परन्तु धारण की उचित विधि और भावना शुद्ध होनी चाहिए।  भोग और मोक्ष की इच्छा रखने वाले चारो वर्णों के लोगों को विशेष कर शिव भगतो को शिव पार्वती की प्रार्थना और प्रसंता के लिए रुद्राक्ष (Rudraksha) जरुर धारण करना चाहिए।  आंवले के फल के सामान रुद्राक्ष समस्त अरिष्टो का नाश करने वाला होता है। बेर के सामान छोटा दिखने वाला रुद्राक्ष सुख और सौभाग्य कीं वृद्धि करने वाला होता है।  रुद्राक्ष की माला से मंत्र जाप करने से अनंत गुना फल मिलता है। जिस माला में अपने आप धागा पिरोया जाने योग्य छेद हो वह उत्तम होता है,प्रयत्न कर के धागा पिरोया जाये तो वह माध्यम श्रेणी का रुद्राक्ष होता है।  ...
रुद्राक्ष का महत्त्व, रुद्राक्ष धारण विधि और रुद्राक्ष के ज्योतिषीय लाभ तथा रोगों में रुद्राक्ष का प्रयोग कैसे करें ?

रुद्राक्ष का महत्त्व, रुद्राक्ष धारण विधि और रुद्राक्ष के ज्योतिषीय लाभ तथा रोगों में रुद्राक्ष का प्रयोग कैसे करें ?

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रुद्राक्ष मानव जाति को भगवान के द्वारा एक अमूल्य देन है। सभी मनुष्य रुद्राक्ष धारण कर सकते हैं। भारतीय संस्कृति में रुद्राक्ष का बहुत महत्व है। माना जाता है कि रुद्राक्ष इंसान को हर तरह की हानिकारक ऊर्जा से बचाता है। इसका इस्तेमाल सिर्फ तपस्वियों के लिए ही नहीं, बल्कि सांसारिक जीवन में रह रहे लोगों के लिए भी किया जाता है। हिन्दू धर्म ग्रंथों के अनुसार ब्राह्मण को श्वेतवर्ण के रुद्राक्ष, क्षत्रिय को रक्तवर्ण के रुद्राक्ष, वैष्य को मिश्रित रुद्राक्ष तथा शूद्र को कृष्णवर्ण के रुद्राक्ष धारण करने चाहिए। रुद्राक्ष धारण करने से बड़ा ही पुण्य प्राप्त होता है तथा जो मनुष्य अपने कण्ठ में बत्तीस, मस्तक पर चालीस, दोनों कानों में छः-छः, दोनों हाथों में बारह-बारह, दोनों भुजाओं में सोलह-सोलह, शिखा में एक और वक्ष पर एक सौ आठ रुद्राक्षों को धारण करता है वह साक्षात भगवान नीलकण्ठ के रूप में जाना जाता है। ...
करोड़ो में से किसी एक व्यक्ति की हथेली में Astrology Science

करोड़ो में से किसी एक व्यक्ति की हथेली में Astrology Science

ज्ञान कोष - Knowledge Power Park, हस्त रेखा - Palm Astrology Reading
हमारी हथेली में बनी ये रेखाएं और आकृतियों के बारे में विस्तार से शास्त्रों में बताया गया है। हथेली की रेखाएं हस्त रेखा ज्ञान के द्वारा बताती है की आप भाग्यशाली है या नहीं। इन रेखाओ और आकृतियों का संबंध व्यक्ति की जीवन में घटने वाली तमाम तरह की घटनाओ से जुड़ा होता है। हमारी हथेली की हृद्य रेखा, जीवन रेखा, विवाह रेखा, भाग्य रेखा बानी होती है। इन सब में भाग्य रेखा का स्थान सबसे जयादा महत्वपूर्ण होता है। हस्त रेखा ज्योतिष की माने तो, भाग्य रेखा और जीवन रेखा के द्वारा व्यक्ति के भाग्य के बारे में काफी कुछ बता देती है। हस्त रेखा विज्ञान और उनसे जुडी रेखाओ के बारे में हम कुछ बिंदु नीचे लिख रहे हैं. अगर किसी व्यक्ति की हथेली पर भाग्य रेखा मणिबंध से शुरू होकर सीधे शनि पर्वत पर जाकर मिलती है. तो ऐसे व्यक्ति भाग्य के बहुत भाग्यशाली होते है। ऐसे व्यक्तियों को अपने जीवन के हर क्षेत्र...
दुनिया के वो 5 रहस्य जो वैज्ञानिकों के लिए बने सरदर्द अभी तक सुलझ नहीं पाए

दुनिया के वो 5 रहस्य जो वैज्ञानिकों के लिए बने सरदर्द अभी तक सुलझ नहीं पाए

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प्रकृति के कई रहस्य आज भी अनसुलझे हैं. वैज्ञानिकों ने कुछ रहस्यों से तो परदा हटा लिया है लेकिन दुनिया की कुछ रहस्यजनक चीजों पर से अभी तक परदा नहीं हटाया जा सका है. आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही पहेलियों के बारे में जो आज भी सभी के लिए अबूझ बनी हुई हैं. दुनिया के वो 5 रहस्य जो वैज्ञानिकों के लिए बने सरदर्द अभी तक सुलझ नहीं पाए द डांसिंग प्लेग ऑफ 1518 इसके बारे में पढ़कर ऐसा लगता है जैसे यह कोई कहानी हो. 1518 में गर्मी के दिनों में शहर स्ट्रासबर्ग में एक महिला ने सड़क पर भयानक तरीके से नाचना शुरू कर दिया था. दिन से रात हो जाती और रात से दिन पर उसका नाचना बंद नहीं होता. एक सप्ताह के भीतर ही 34 अन्य महिलाओं ने भी उसके साथ नाचना शुरू कर दिया. उन्हें देखकर ऐसा लगता था जैसे कि उनके अंदर किसी आत्मा का वास हो गया हो. नाचने की ना तो कोई वजह थी और ना ही कोई खास मौका. एक महीने के अंदर नाचने वाली म...
ज्ञान कोष हिंदू रीति से रखें बच्चे का नाम – नामकरण विधि

ज्ञान कोष हिंदू रीति से रखें बच्चे का नाम – नामकरण विधि

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कुछ ध्यान रखने योग्य बातें शिशु का जन्म जिस नक्षत्र में हुआ है नाम भी उसी के अनुसार रखा जाता है। शिशु के राशि और नक्षत्र की जानकारी पूरी तरह सही होनी चाहिए। शिशु का नाम अर्थपूर्ण होना बहुत जरूरी है। परिवार के अहम सदस्य इस संस्कार में शिशु को अपना आर्शीवाद देते हैं। हिंदुओं में नामकरण संस्कार का विशेष महत्व होता है। नामकरण के अर्थ को समझें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है नाम और करण। नाम का अर्थ तो ज्ञात ही है संस्कृत में करण का अर्थ होता है बनाना या सृजन करना। नामकरण संस्कार में नवजात के नाम रखने की प्रक्रिया को संपन्न किया जाता है। नाम रखने की इस प्रक्रिया को पूरी विधि के साथ खुशीपूर्वक पूरा किया जाता है। इस मौके पर परिवार सभी मुख्य सदस्य एकत्र होते हैं। नामकरण संस्कार शिशु के जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन के बाद उसका नामकरण संस्कार किया जाता है, जिसमें शिशु का नाम...
आ रहा है सावन का आखिरी सोमवार में एेसे करें शिव जी की पूजा

आ रहा है सावन का आखिरी सोमवार में एेसे करें शिव जी की पूजा

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सावन माह में शिव पूजा का महत्व होता है। अब तक आपने जाना कि इस दौरान पूजा में किन बातों को करने से लाभ होता है। अब जाने कि क्या नहीं करना चाहिए। एेसे करें भगवान शिव की पूजा सावन माह में प्रतिदिन पूजा शुरू करने से पहले एक तांबे का पात्र, दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, अकौड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, आैर पान आदि एकत्रित कर लें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और चावल लेकर देवता का आह्वान करते हुए अपने नाम और मनोकामना के साथ पूजा का संकल्प लें। हाथों में लिए गए जल को पृथ्वी पर छोड़ दें। संकल्प लेने के बाद ‘ऊं साम्ब शिवाय नम:’ आव्हानयामि स्थापयामि का जाप करते हुए चावल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध जल से स्नान कराएं। अब वस्त्र अर्पित कर चंदन आैर अष्टगंध आदि लगाएं। अंत में बिल्व पत्र अर...
दुर्योधन ने भानुम‍ती से किया था जबरन विवाह – भानुमति का रहस्य

दुर्योधन ने भानुम‍ती से किया था जबरन विवाह – भानुमति का रहस्य

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दुर्योधन की पत्नी का नाम भानुमति था। भानुमती के कारण ही यह मुहावरा बना है- कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा। भानुमती काम्बोज के राजा चन्द्रवर्मा की पुत्री थी। भानुपति बहुत ही सुंदर, आकर्षक, बुद्धिमान और ताकतवर थी। उसकी सुंदरता और शक्ति के किस्से प्रसिद्ध थे। यही कारण था कि भानुमती के स्वयंवर में शिशुपाल, जरासंध, रुक्मी, वक्र, कर्ण आदि राजाओं के साथ दुर्योधन भी गया हुआ था। कहते हैं कि जब भानुमती हाथ में माला लेकर अपनी दासियों और अंगरक्षकों के साथ दरबार में आई और एक-एक करके सभी राजाओं के पास से गुजरी, तो वह दुर्योधन के सामने से भी गुजरी। दुर्योधन चाहता था कि भानुमती माला उसे पहना दे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दुर्योधन के सामने से भानुमती आगे आगे बढ़ गई। दुर्योधन ने क्रोधित होकर तुरंत ही भानुमती के हाथ से माला झपटकर खुद ही अपने गले में डाल ली। इस दृष्य को देखकर सभी राजाओं ने तल...
कैसे होता है बच्चे का नामकरण संस्कार, जानिए पौराणिक महत्व और विधि

कैसे होता है बच्चे का नामकरण संस्कार, जानिए पौराणिक महत्व और विधि

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नामकरण संस्कार के बारे में स्मृति संग्रह में लिखा है-नामकरण संस्कार से आयु एवं तेज में वृद्धि होती है। नाम की प्रसिद्धि से व्यक्ति का लौकिक व्यवहार में एक अलग अस्तित्व उभरता है। नामकरण संस्कार संपन्न करने के संबंध में अलग-अलग स्थानों पर समय की विभिन्नताएं सामने आई हैं। जन्म के 10वें दिन सूतिका का शुद्धिकरण यज्ञ कराकर नामकरण संस्कार कराया जाता है। ALSO READ: बच्चों के नाम ऐसे न रखें, वरना... पढ़ें 8 जरूरी बातें गोभिल गह्यसूत्रकार के अनुसार 100 दिन या 1 वर्ष बीत जाते के बाद भी नामकरण संस्कार कराने का प्रचलन है। दो तरह के नाम रखने का विधान है। एक गुप्त नाम जिसे सिर्फ जातक के माता पिता जानते हों तथा दूसरा प्रचलित नाम जो लोक व्यवहार में उपयोग में लाया जाये। नाम गुप्त रखने का कारण जातक को मारक , उच्चाटन आदि तांत्रिक क्रियाओं से बचाना है। प्रचलित नाम पर इन सभी क्रियाओं का असर नही...
चक्रव्यूह क्या था, इसे कैसे तोड़ा जाता है?

चक्रव्यूह क्या था, इसे कैसे तोड़ा जाता है?

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भगवान श्रीकृष्ण की नीति के चलते अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को चक्रव्यूह को भेदने का आदेश दिया गया। यह जानते हुए भी कि अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदना तो जानते हैं, लेकिन उससे बाहर निकलना नहीं जानते। दरअसल, अभिमन्यु जब सुभद्रा के गर्भ में थे तभी चक्रव्यूह को भेदना सीख गए थे लेकिन बाद में उन्होंने चक्रव्यूह से बाहर निकलने की शिक्षा कभी नहीं ली। अभिमन्यु श्रीकृष्ण के भानजे थे। श्रीकृष्ण ने अपने भानजे को दांव पर लगा दिया था। अभिमन्यु के चक्रव्यूह में जाने के बाद उन्हें चारों ओर से घेर लिया गया। घेरकर उनकी जयद्रथ सहित 7 योद्धाओं द्वारा निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई, जो कि युद्ध के नियमों के विरुद्ध था। कहते हैं कि श्रीकृष्ण यही चाहते थे। जब नियम एक बार एक पक्ष तोड़ देता है, तो दूसरे पक्ष को भी इसे तोड़ने का मौका मिलता है। चक्रव्यूह क्या होता है? युद्ध को लड़ने के लिए पक्ष या विपक्ष अपने हिसा...