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दुनिया के वो 5 रहस्य जो वैज्ञानिकों के लिए बने सरदर्द अभी तक सुलझ नहीं पाए

दुनिया के वो 5 रहस्य जो वैज्ञानिकों के लिए बने सरदर्द अभी तक सुलझ नहीं पाए

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प्रकृति के कई रहस्य आज भी अनसुलझे हैं. वैज्ञानिकों ने कुछ रहस्यों से तो परदा हटा लिया है लेकिन दुनिया की कुछ रहस्यजनक चीजों पर से अभी तक परदा नहीं हटाया जा सका है. आइए जानते हैं कुछ ऐसी ही पहेलियों के बारे में जो आज भी सभी के लिए अबूझ बनी हुई हैं. दुनिया के वो 5 रहस्य जो वैज्ञानिकों के लिए बने सरदर्द अभी तक सुलझ नहीं पाए द डांसिंग प्लेग ऑफ 1518 इसके बारे में पढ़कर ऐसा लगता है जैसे यह कोई कहानी हो. 1518 में गर्मी के दिनों में शहर स्ट्रासबर्ग में एक महिला ने सड़क पर भयानक तरीके से नाचना शुरू कर दिया था. दिन से रात हो जाती और रात से दिन पर उसका नाचना बंद नहीं होता. एक सप्ताह के भीतर ही 34 अन्य महिलाओं ने भी उसके साथ नाचना शुरू कर दिया. उन्हें देखकर ऐसा लगता था जैसे कि उनके अंदर किसी आत्मा का वास हो गया हो. नाचने की ना तो कोई वजह थी और ना ही कोई खास मौका. एक महीने के अंदर नाचने वाली म
ज्ञान कोष हिंदू रीति से रखें बच्चे का नाम – नामकरण विधि

ज्ञान कोष हिंदू रीति से रखें बच्चे का नाम – नामकरण विधि

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कुछ ध्यान रखने योग्य बातें शिशु का जन्म जिस नक्षत्र में हुआ है नाम भी उसी के अनुसार रखा जाता है। शिशु के राशि और नक्षत्र की जानकारी पूरी तरह सही होनी चाहिए। शिशु का नाम अर्थपूर्ण होना बहुत जरूरी है। परिवार के अहम सदस्य इस संस्कार में शिशु को अपना आर्शीवाद देते हैं। हिंदुओं में नामकरण संस्कार का विशेष महत्व होता है। नामकरण के अर्थ को समझें तो यह दो शब्दों से मिलकर बना है नाम और करण। नाम का अर्थ तो ज्ञात ही है संस्कृत में करण का अर्थ होता है बनाना या सृजन करना। नामकरण संस्कार में नवजात के नाम रखने की प्रक्रिया को संपन्न किया जाता है। नाम रखने की इस प्रक्रिया को पूरी विधि के साथ खुशीपूर्वक पूरा किया जाता है। इस मौके पर परिवार सभी मुख्य सदस्य एकत्र होते हैं। नामकरण संस्कार शिशु के जन्म के ग्यारहवें या बारहवें दिन के बाद उसका नामकरण संस्कार किया जाता है, जिसमें शिशु का नाम
आ रहा है सावन का आखिरी सोमवार में एेसे करें शिव जी की पूजा

आ रहा है सावन का आखिरी सोमवार में एेसे करें शिव जी की पूजा

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सावन माह में शिव पूजा का महत्व होता है। अब तक आपने जाना कि इस दौरान पूजा में किन बातों को करने से लाभ होता है। अब जाने कि क्या नहीं करना चाहिए। एेसे करें भगवान शिव की पूजा सावन माह में प्रतिदिन पूजा शुरू करने से पहले एक तांबे का पात्र, दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, अकौड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, आैर पान आदि एकत्रित कर लें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और चावल लेकर देवता का आह्वान करते हुए अपने नाम और मनोकामना के साथ पूजा का संकल्प लें। हाथों में लिए गए जल को पृथ्वी पर छोड़ दें। संकल्प लेने के बाद ‘ऊं साम्ब शिवाय नम:’ आव्हानयामि स्थापयामि का जाप करते हुए चावल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध जल से स्नान कराएं। अब वस्त्र अर्पित कर चंदन आैर अष्टगंध आदि लगाएं। अंत में बिल्व पत्र अर
दुर्योधन ने भानुम‍ती से किया था जबरन विवाह – भानुमति का रहस्य

दुर्योधन ने भानुम‍ती से किया था जबरन विवाह – भानुमति का रहस्य

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दुर्योधन की पत्नी का नाम भानुमति था। भानुमती के कारण ही यह मुहावरा बना है- कहीं की ईंट कहीं का रोड़ा, भानुमती ने कुनबा जोड़ा। भानुमती काम्बोज के राजा चन्द्रवर्मा की पुत्री थी। भानुपति बहुत ही सुंदर, आकर्षक, बुद्धिमान और ताकतवर थी। उसकी सुंदरता और शक्ति के किस्से प्रसिद्ध थे। यही कारण था कि भानुमती के स्वयंवर में शिशुपाल, जरासंध, रुक्मी, वक्र, कर्ण आदि राजाओं के साथ दुर्योधन भी गया हुआ था। कहते हैं कि जब भानुमती हाथ में माला लेकर अपनी दासियों और अंगरक्षकों के साथ दरबार में आई और एक-एक करके सभी राजाओं के पास से गुजरी, तो वह दुर्योधन के सामने से भी गुजरी। दुर्योधन चाहता था कि भानुमती माला उसे पहना दे लेकिन ऐसा हुआ नहीं। दुर्योधन के सामने से भानुमती आगे आगे बढ़ गई। दुर्योधन ने क्रोधित होकर तुरंत ही भानुमती के हाथ से माला झपटकर खुद ही अपने गले में डाल ली। इस दृष्य को देखकर सभी राजाओं ने तल
कैसे होता है बच्चे का नामकरण संस्कार, जानिए पौराणिक महत्व और विधि

कैसे होता है बच्चे का नामकरण संस्कार, जानिए पौराणिक महत्व और विधि

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नामकरण संस्कार के बारे में स्मृति संग्रह में लिखा है-नामकरण संस्कार से आयु एवं तेज में वृद्धि होती है। नाम की प्रसिद्धि से व्यक्ति का लौकिक व्यवहार में एक अलग अस्तित्व उभरता है। नामकरण संस्कार संपन्न करने के संबंध में अलग-अलग स्थानों पर समय की विभिन्नताएं सामने आई हैं। जन्म के 10वें दिन सूतिका का शुद्धिकरण यज्ञ कराकर नामकरण संस्कार कराया जाता है। ALSO READ: बच्चों के नाम ऐसे न रखें, वरना... पढ़ें 8 जरूरी बातें गोभिल गह्यसूत्रकार के अनुसार 100 दिन या 1 वर्ष बीत जाते के बाद भी नामकरण संस्कार कराने का प्रचलन है। दो तरह के नाम रखने का विधान है। एक गुप्त नाम जिसे सिर्फ जातक के माता पिता जानते हों तथा दूसरा प्रचलित नाम जो लोक व्यवहार में उपयोग में लाया जाये। नाम गुप्त रखने का कारण जातक को मारक , उच्चाटन आदि तांत्रिक क्रियाओं से बचाना है। प्रचलित नाम पर इन सभी क्रियाओं का असर नही
चक्रव्यूह क्या था, इसे कैसे तोड़ा जाता है?

चक्रव्यूह क्या था, इसे कैसे तोड़ा जाता है?

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भगवान श्रीकृष्ण की नीति के चलते अर्जुन के पुत्र अभिमन्यु को चक्रव्यूह को भेदने का आदेश दिया गया। यह जानते हुए भी कि अभिमन्यु चक्रव्यूह भेदना तो जानते हैं, लेकिन उससे बाहर निकलना नहीं जानते। दरअसल, अभिमन्यु जब सुभद्रा के गर्भ में थे तभी चक्रव्यूह को भेदना सीख गए थे लेकिन बाद में उन्होंने चक्रव्यूह से बाहर निकलने की शिक्षा कभी नहीं ली। अभिमन्यु श्रीकृष्ण के भानजे थे। श्रीकृष्ण ने अपने भानजे को दांव पर लगा दिया था। अभिमन्यु के चक्रव्यूह में जाने के बाद उन्हें चारों ओर से घेर लिया गया। घेरकर उनकी जयद्रथ सहित 7 योद्धाओं द्वारा निर्मम तरीके से हत्या कर दी गई, जो कि युद्ध के नियमों के विरुद्ध था। कहते हैं कि श्रीकृष्ण यही चाहते थे। जब नियम एक बार एक पक्ष तोड़ देता है, तो दूसरे पक्ष को भी इसे तोड़ने का मौका मिलता है। चक्रव्यूह क्या होता है? युद्ध को लड़ने के लिए पक्ष या विपक्ष अपने हिसा