shri Hanuman Chalisa श्री हनुमान चालीसा Mp3 Lyrics Song Shankar Mahadevan

 

hanuman_chalisa
Mp3 Song/Lyrics Name :श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारि वर्णो रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि|Shri Guru Saroj Raj Nij Man Mukur Sudhari Varno Raghuvar Vimal Jasu Jo Dayaku Fal Chari|
Singer :Shankar Mahadevan
Album Name :Bal Hanuman
Published Year :2012
File Size :13Mb Time Duration :9:36Min

 



View In English Lyrics



श्री गुरु चरण सरोज रज निज मन मुकुर सुधारि
वर्णो रघुवर विमल जसु जो दायकु फल चारि
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौ पवन कुमारं
बल बुद्धि विद्या देहु मोहे हरहु कलेसविकार

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर
जय कपीस तिहुँ लोक उजागर
राम दूत अतुलित बल धाम
अंजनी -पुत्र पवन सुत नामा
महावीर विक्रम बजरंगी
कुमति निवार सुमति के संगी
कंचन वरन विराज सुबेसा
कानन कुण्डल कुंचित कैसा
हाथ वज्रा और ध्वजा विराजे
काँधे मूँज जनेहु साजे

शंकर सुवन केसरी नंदन
तेज प्रताप महा जग वंदन
विद्यावान गुनी अति चातुर
राम काज करिबे को आतुर
प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया
राम लखन सीता मन बसिया
सुक्ष्म रूप धरी सियहि दिखावा
विकट रूप धरी लंका जलावा
भीमा रूप धरी असुर संघारे
रामचन्द्र के काज सँवारे

लाये संजीवन लखन जियाये
श्री रघुवीर हरषि उर लाये
रघुपति किन्ही बहुत बधाई
तुम मम प्रिये भारत -ही सैम भाई
सहस बदन तुम्हरो यश गावे
अस कही श्रीपति कंठ लगावे
सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा
नारद सारद सहित अहीसा
याम कुबेर दिगपाल जहाँ ते
कवि कोविद कही सके कहाँ ते

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा
राम मिलाय राजपद दीन्हा
तुम्हरो मंत्र विभीषण माना
लंकेश्वर भय सुब जग जाना
युग सहस्त्र जो जान पर भानु
लील्यो ताहि मधुर फल जानू
प्रभु मुद्रिका मिली मुख माही
जलधि लांघी गए अचरज नाही
दुर्गम काज जगत के जेते
सुगम नुग्रहा तुम्हरे तेते

राम द्वारे तुम रखवारे
होयत न आज्ञा बिनु पैसारे
सुब सुख लहै तुम्हारी सरना
तुम रक्षक काहू को डरना
आपण तेज सम्हारो आपै
तीन्हों लोक हाँक ते काँपै
भूत पिसाच निकट नहीं आवै
महावीर जब नाम सुनवाई
नासे रोग हरे सब पीरा
जपत निरंतर हनुमंत बीरा

संकट से हनुमान छुडावे
मैं करम वचन ध्यान जो लावै
सब पर राम तपस्वी राजा
तिनके काज सकल तुम साज
और मनोरथ जो कोई लावै
सही अमित जीवन फल पावै
चारों युग परताप तुम्हारा
है परसिद्ध जगत उजियारा
साधू संत के तुम रखवारे
असुर निकंदन राम दुल्हारे

अष्ट सीधी नव निधि के धाता
उस वार दीन जानकी माता
राम रसायन तुम्हारे पास
सदा रहो रघुपति के दास
तुम्हारे भजन राम को पावै
जनम जनम के दुःख बिसरावै
अंत काल रघुवीर पर जाई
जहां जनम हरी -बख्त कहाई
और देवता चित न धरेही
हनुमंत से ही सर्वे सुख करहि

संकट कटे मिटे सब पीरा
जो सुमिरै हनुमत बलबीरा
जय जय जय हनुमान गोसाहिन
कृपा करहु गुरुदेव की न्यहीन
जो सात बार पाठ करे कोई
छूटहि बंधी महा सुख होई
जो यह पढ़े हनुमान चालीसा
होए सिद्धि सखी गौरीसा
तुलसीदास सदा हरी चेरा
कीजै दस ह्रदये में डेरा

पवंत्नायी संकट हराना मंगल मूर्ति रूपा
राम लखन सीता सहित ह्रदये बसहु सुर

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