जय गिरिजा पति दीनदयाला || Jai Girija Pati Dinadayala Shiv Chalisa Shiv Bhajan Full Hindi Lyrics

 

#BHAKTIGAANE #LordShivChalisa
Lyrics Name:जय गिरिजा पति दीनदयाला
Album Name:Shiv Chalisa
Published Year:2017
File Size:21:MB
Time Duration:14:56




View In English Lyrics

जय गणेश गिरिजा सुवन
मंगल मूल सूजन
कहात अयोध्या दास तुम देऊ
अभय वरदान

जय गिरिजा पति दीनदयाला
सदा करात संतान प्रतिपाला
भला चन्द्रमा सोहत नाइके
कानन कुण्डल नागफनी के
अंग गौर शिरा गंगा बहाये
मुण्डमाला तन चार लगाए
वस्त्र खला बाघम्बर सोहैं
छवि को देखा नागा मुनि मोहैं
मैना मातु की हवाई दुलारी
वामा अंग सोहत छवि न्यारी

करा त्रिशूल सोहत छवि
भरी करात सदा शत्रुन छायाकारी
नंदी गणेश सोहैं तहँ
कैसे सागर मध्य कमल हैं जैसे
कार्तिक श्याम और गण रोओ
या छवि को कही जाता न कौओ
देवन जबहि जाया पुकारा
तबाही दुख प्रभु आप निवारा
किया उपद्रव तारक भरी
देवन सब मिली तुमहि जुहारी
तुरता षडानना आप पठायउ
लव निमेष माहि मरी गिरायउ

आप जलंधरा असुरा संहारा
सुयश तुम्हारा विदित संसारा
त्रिपुरासुर सन युधा मचाई
सभी कृपाकर लीन बचाई
किया तपहिं भगीरथ भरी
पुरहि प्रतिज्ञा तासु पुरारी
दानिन माह तुम समको नहीं
सेवक अस्तुति करात सदाहीं
वेदा नाम महिमा तव गई
अकथा आनंदी भेद नहीं पाई
प्रगति उदधि मंटन ते
ज्वाला जरिए सूरा-सुर भाये बिहाला
महादेव तब करि सहाई
नीलकंठ तब नाम कहै

पूजन रामचंद्र जब कीन्हा
जीती के लंका विभीषण दीन्हि
साहस कमल में हो रहे धरी
कीन्हा परीक्षा तबहिं पुरारी
एक कमल प्रभु राखेउ जोई
कुशल नैन पूजन चाहें सोइ
कठिन भक्ति देखि प्रभु शंकर
भाये प्रसन्ना दिए -इच्छित वर
जय जय जय अनंत अविनाशी
करात कृपा सबके घाट वासी

दुष्ट सकल नित मोहिं सतावै
भ्रमत रहे मन चैन न आवे
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो
यही अवसर मोहि आना उबारो
लाई त्रिशूल शत्रुन को मारो
संकट से मोहिं आना उबारो
माता पिता भ्राता सब होइ
संकट में पूछत नहीं कोई
स्वामी एक है आशा तुम्हारी
आऐहराहु अब संकट भरी
धन निर्धन को देत सदाहीं
जो कोई जाचे वो फल पाहि

अस्तुति केहि विधि कराइ तुम्हारी
शम्भुनाथ अब तक तुम्हारी
शंकर हो संकट के नाशन
विघ्न विनाशन मंगल कारन
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं
शरद नारद शिक्षा नवावैं
नमो नमो जय नमः शिवाय
सूरा ब्रह्मादिक पर न पाया
जो यह पता कराइ मन लाई
तो कोण होता है शम्भू सही
रिनियाँ जो कोई हो अधिकारी
पता कराइ सो पवन हरी

पुत्र -हिन् इच्छा कर कोई
निश्चय शिवा प्रसाद तेहिं होइ
पंडित त्रयोदशी को लावै
ध्यान पूर्वक होमा करवाई
त्रयोदशी व्रत करे हमेशा
तन नहीं ताके रहे कलेशा
धूप दीपा नैवेद्य चढ़ावे
शंकर सम्मुख पाठ सुनावे
जन्मा जन्मा के पापा नसावे
अंता धामा शिवपुरा में पावे
कहे आयोध्या आस तुम्हारी
जाने स्कूल दुःख हर हु हमारी

नित्य नेम कर प्रातः ही पथ करो चालीसा
तुम मेरी मनो कामना
पूर्ण करो जगदीश मगसरछती
हे मंतर तू संवत चौसठ जान
स्तुति चालीसा शिव हे पूर्ण कीन कल्याण

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