Kabir Amritwani Full – Kabir Ke Dohe – Kabir Vani कबीर के दोहे kabir amritwani jubin nautiyal


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Kabir Amritwani Full - Kabir Ke Dohe - Kabir Vani कबीर के दोहे Kabir Amritwani Jubin Nautiyal

Title : Kabir Amritwani Full – Kabir Ke Dohe – Kabir Vani कबीर के दोहे kabir amritwani jubin nautiyal
Category Name: Lord Shiv Bhajan
Author Name: Prince Nishad
Publishing Year: 2021-12-23 17:02:20
Music Lenth: 00:10:20 Min
Size: 7 MB
Downloads> :MP3 (Android)|M4A (Apple)| Download Video

Songs Info : This is very beautiful bhajan Kabir Amritwani Full – Kabir Ke Dohe – Kabir Vani कबीर के दोहे kabir amritwani jubin nautiyal that will hear you become more energized many such Bhajan are available in Bhaktigaane, listen to yourself and also tell others and share them together to help us

Songs Info :बहुत ही सुन्दर भजन हैं जिसे सुनकर आप भाव विभोर हो जायेंगे ऐसे ही बहुत सारे भजनो का संग्रह हैं भक्तिगाने में मिलेगा , खुद भी सुने और दुसरो को भी सुनाये और साथ में शेयर कर हमें सहयोग प्रदान करे

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Kabir Amritwani Full – Kabir Ke Dohe – Kabir Vani कबीर के दोहे kabiramritwani jubin nautiyal #kabiramritwani #kabirkedohe

00:28 गुरु गोविन्द दोऊ खड़े , काके लागू पाय|
बलिहारी गुरु आपने , गोविन्द दियो बताय
01:14 ऐसी वाणी बोलिए, मन का आपा खोये।
औरन को शीतल करे, आपहुं शीतल होए।।
02:02 बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर ।
पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर ।।
02:46 निंदक नियरे राखिए, ऑंगन कुटी छवाय, बिन पानी, साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय।
03:35 दुःख में सुमिरन सब करे सुख में करै न कोय।
जो सुख में सुमिरन करे दुःख काहे को होय ॥
04:19 माटी कहे कुम्हार से, तू क्या रोंदे मोहे,
एक दिन ऐसा आएगा, मैं रोंदूगी तोहे
05:03 मेरा मुझमे कुछ नहीं  सब तेरा ।
सब तेरा  सब तेरा सब तेरा ।।
05:52 काल करे सो आज कर, आज करे सो अब ।
पल में प्रलय होएगी, बहुरि करेगा कब ॥
06:36 जाति न पूछो साधु की, पूछ लीजिये ज्ञान ।
मोल करो तरवार का, पड़ा रहन दो म्यान ।।
07:25 नहाये धोये क्या हुआ, जो मन मैल न जाए ।
मीन सदा जल में रहे, धोये बास न जाए ।।
08:10 पोथी पढ़ि पढ़ि जग मुआ, पंडित भया न कोय ।
ढाई आखर प्रेम का, पढ़े सो पंडित होय ।।
08:52 साँई इतना दीजिए, जामे कुटुम समाय ।
मैं भी भूखा ना रहूँ, साधु न भूखा जाय ।।
09:36 माखी गुड में गडी रहे, पंख रहे लिपटाए ।
हाथ मेल और सर धुनें, लालच बुरी बलाय ।।


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