मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स

मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स

Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re Durga Hindi Bhajan Lyrics



Singer By: Narendra Chanchal
Lyrics By : Saral Kavi

मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स Sung By : Narendra Chanchal This version of song is written by Saral Kavi मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स Publisher : T-Series It is written very beautifully, if you like this song, then share it with others, share it with your friends or Facebook or Whatsapp and give us support.

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मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स -HD Video


Songs Info : बहुत ही सुन्दर गाना हैं मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स | मेरी झोली छोटी पड़ गई Meri Jholi Chhoti Pad Gai Re दुर्गा हिंदी भजन लिरिक्स जिसे लिखा हैं Saral Kavi और गया हैं Narendra Chanchal बहुत ही सुन्दर तरह से लिखा गया हैं अगर ये गाना आपको अच्छा लगा तो दुसरो के साथ भी शेयर करे अपने दोस्तों या Facebook या Whatsapp पर शेयर करे और हमें सहयोग प्रदान करे .



मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे,
इतना दिया मेरी माता……..

मेरी बिगड़ी माँ ने बनायीं,
सोयी तकदीर जगायी,
ये बात ना सुनी सुनाई,
मैं खुद दीप जलाता रे,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़……

मान मिला सम्मान मिला,
गुणवान मुझे संतान मिली,
धन धान मिला नित ध्यान मिला,
माँ से ही मुझे पहचान मिली
घरबार दिया मुझे माँ ने,
बेशुमार दिया मुझे माँ ने,
हर बार दिया मुझे माँ ने,
जब जब मैं माँगने जाता,
मुझे इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़…

मेरा रोग कटा मेरा कष्ट मिटा,
हर संकट माँ ने दूर किया,
भूले से कभी जो गुरुर किया,
मेरे अभिमान को चूर किया,
मेरे अंग संग हुई सहाई,
भटके को राह दिखाई,
क्या लीला माँ ने रचाई,
मैं कुछ भी समझ ना पाता,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़…..

उपकार करे भव पार करे,
सपने सब के साकार करे
ना देर करे माँ मेहर करे,
भक्तो के सदा भंडार भरे
महिमा निराली माँ की,
दुनिया है सवाली माँ की
जो लगन लगा ले माँ की,
मुश्किल में नहीं घबराता रे
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़…

कर कोई जतन ऐ चंचल मन,
तू होके मगन चल माँ के भवन,
पा जाये नयन पावन दर्शन,
हो जाये सफल फिर ये जीवन,
तू थाम ले माँ का दामन,
ना चिंता रहे ना उलझन,
दिन रात मनन कर सुमिरन,
चाकर माँ कहलाता,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़…

मेरी झोली छोटी पड़ गयी रे,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी बिगड़ी माँ ने बनायीं,
सोयी तकदीर जगायी,
ये बात ना सुनी सुनाई,
मैं खुद बीती बतलाता रे,
इतना दिया मेरी माता,
मेरी झोली छोटी पड़…

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