आ रहा है सावन का आखिरी सोमवार में एेसे करें शिव जी की पूजा

 

सावन माह में शिव पूजा का महत्व होता है। अब तक आपने जाना कि इस दौरान पूजा में किन बातों को करने से लाभ होता है। अब जाने कि क्या नहीं करना चाहिए।

एेसे करें भगवान शिव की पूजा

सावन माह में प्रतिदिन पूजा शुरू करने से पहले एक तांबे का पात्र, दूध, अर्पित किए जाने वाले वस्त्र, चावल, अष्टगंध, दीपक, तेल, रुई, धूपबत्ती, चंदन, धतूरा, अकौड़े के फूल, बिल्वपत्र, जनेऊ, फल, मिठाई, नारियल, पंचामृत, आैर पान आदि एकत्रित कर लें। इसके बाद हाथ में जल, फूल और चावल लेकर देवता का आह्वान करते हुए अपने नाम और मनोकामना के साथ पूजा का संकल्प लें। हाथों में लिए गए जल को पृथ्वी पर छोड़ दें। संकल्प लेने के बाद ‘ऊं साम्ब शिवाय नम:’ आव्हानयामि स्थापयामि का जाप करते हुए चावल अर्पित करें। इसके बाद पंचामृत से स्नान कराकर शुद्ध जल से स्नान कराएं। अब वस्त्र अर्पित कर चंदन आैर अष्टगंध आदि लगाएं। अंत में बिल्व पत्र अर्पित कर धूप और दीप दिखाएं। इसके बाद ‘ऊं नम: शिवाय’ का जाप करने के बाद शिव आरती करें।

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इन बातों को करने से रखें परहेज

इस दौरान पूजा में इन सामान्य गलतियों को करने से बचें। याद रखें कि शिवलिंग से पूर्व दिशा की ओर मुंह करके नहीं बैठना चाहिए। शिवलिंग से उत्तर दिशा में भी न बैठें क्योंकि इस दिशा में पत्नी शक्ति स्वरूपा माता पार्वती का स्थान होता है। शिव पूजा में शिवलिंग से पश्चिम दिशा में भी नहीं बैठा जाता है क्योंकि इस दिशा में शिव जी की पीठ होती है, जिसके चलते भक्तों को देवपूजा करने से शुभ फल नहीं मिल पाते। अत: केवल दक्षिण दिशा में ही मुख करके बैठें। शिव जी या शिवलिंग पर कभी भी खंडित आैर कटे फटे बिल्व पत्र ना अर्पित करें।


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ये हैं कुछ विशेष अभिषेक 

शिव जी का अभिषेक करने का उनकी पूजा में विशेष महत्व होता है। ये अभिषेक कर्इ पदार्थों से किये जाते हैं आैर उनका अलग अलग फल प्राप्त होता है। जैसे दूध से शिव जी का अभिषेक करने पर परिवार में कलह, मानसिक अवसाद और अनचाहे दुःख व कष्टों से मुक्ति मिलती है। शिव सहस्रनाम का पाठ करते हुए घी का अभिषेक करने से वंश वृद्धि का आर्शिवाद मिलता है। इत्र से शिव जी का अभिषेक करने से भौतिक सुखों की प्राप्ति होती है। जल से अभिषेक करने पर मानसिक शांति आैर गंगा जल से अभिषेक से चारो पुरूषार्थ की प्राप्ति होती है। शहद के अभिषेक से रोग मुक्ति होती है। गन्ने के रस से अभिषेक करने से आर्थिक समृद्धि प्राप्त होती है। जबकि सरसों के तेल से अभिषेक करने से शत्रुओं का नाश होता है, रूके हुए काम बनते हैं आैर मान-सम्मान में वृद्धि होती है।

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