श्री महा लक्ष्मी चालीसा Shree Maha Lakshmi Chalisa Hindi Lyrics Anuradha Paudwal I Sampoorna Mahalaxmi Poojan

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Lyrics Name : श्री महा लक्ष्मी चालीसा  जय जय श्री महालक्ष्मी करू मात तव ध्यान
Singer Name : Anuradh Paudwal
Album Name : MahaLakshmi
Published Year : 2017
File Size : 9MB
Time Durationn : 10 M


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श्री महा लक्ष्मी चालिसा गीत
जय जय श्री महालक्ष्मी करू मात तव ध्यान
सिद्ध काज मम कीजिये
निज शिशु सेवक जान

नमो महा लक्ष्मी जय माता
तेरो नाम जगत विख्याता
आदिशक्ति हो मात भवानी
पुजत सब ने मुनी ज्ञानी

जगत पालनी सब सुख करणी
निज जन हित भण्डारण भरनी
श्र्वेत कमल दल पर तब आसन
मात शुशोहित है पदमाशन

श्वेताम्बर अरु श्वेत आभूषण
स्वेत ही स्वेत सुसज्जित पुष्पन
शीश छत्र अति रूप विशाला
गले सोहे मुक्तन की माला

सुंदर सोहे कुंचित केशा
विमल नयन अरु अनुपम भेषा
कमल नाल सैम सम भुज तव चारि
सुर नर मुनी जन हित सुखकारी

अद्भुत छटा मात तब बानी
सकल विश्व कीन्हो सुख खानी
शांति स्वाभाव मृदुल तब बानी
सकल विश्व जो हो सुख खानी

महालक्ष्मी ध्यान हो माई
पंच तत्त्व में सृष्टि रचाई
जीव चराकर तुम उपजाई
पशू पक्षी नर नारी बनाई

शिति तल अगनित वृक्ष जमाये
अमि तरंग फल फूल सुहाए
छबी विलोक सुर नर नारी
करे सदा तव जय जयकारी

सुरपति और नरपत सब ध्यावे
तेरे सम्मुख शीश नवावे
चारहु वेदन तव यश गाया
महिमा अगम पार नहीं पाया

जापर करहु मात तुम दया
सो ही जग में धन्य कमाया
पल में राजहि रंक बनाओ
रंक राव कर बिलमन लाओ

जिन घर करहु मात तुम बासा
उनका यश हो विश्वप्रकाशा
जो ध्यावे सो बहु सुख पावे
विमुख रहे हो दुःख उठावे

महालक्ष्मी जन सुख दाई
ध्याऊ तुमको शीश नवाई
निज जन जानी मोहि अपनाओ
सुख संपाती दे दूख नसाओ

ओम श्री श्री जय सूख की ख़ानी
रिधि सिद्धि देयऊ मात जन जानी
ॐ ह्रीं ह्रीं सब व्याधि हटाओ
जन उर विमल द्रष्टि दरशाओ

ओम क्लेम क्लेम शत्रुन क्षय कीजै
जन हित मत अभय वर दीजै
ओम जय जय जयती जय जननी
सकल काज भक्तन के सरनी

ॐ नमो नमो भव निधि तारिणी
तरणि भंवर से पार उतरनी
सुनहु मात यह विनय हमारी
पुरवहु आशन करहु अबारी

ऋणी दुखी जो तुम्हे ध्यावे
सो प्राणी सुख सम्पति पावे
रोग ग्रसित जो ध्यावे कोई
ताकि निर्मल काया होइ

विष्णुप्रिया जय जय महारानी
महिमा अमित ना जाये बखानी
पुत्रहीन जो ध्यान लगावे
पाये सूत अति ही उलसावे

त्राहि त्राहि शरणागत तेरी
करहु मात अब नेक न देरी
आवहु मात विलंब न कीजै
ह्रदय निवास भक्त वर दीजै

जानू जप तप का नहीं भेवा
पार करो भव निध बिन खेवा
विनवो बार बार कर जोरि
पूरण आशा करहु अब मोरी

जानि दास मम संकट टारो
सकल व्याधि से मोहि उबारौ
जो तब सुरति रहे लव लाइ
सो जग पावे सुयश बढ़ाई

छायो यश तेरो संसारा
पावत शेष शम्भू नहीं पारा
गोविन्द निशदिन शरन तिहारी
करहु पूरण अभिलाष हमारी

महालक्ष्मी की कथा
पड़े सूने चित्त लाये
ताही पदार्थ मिले अब
कहइ वेद अस गाये


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