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Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-37॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – सप्तत्रिंशत् श्लोक॥

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Geeta Shlok/Lyrics Name:यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्।yattadagre vishamiv parinaamemrtopamam.
Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta
Published Year : 2016
File Size:68Kb: Time Duration:00:17



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यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्।
तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम्।।

॥ श्लोक का अर्थ ॥

हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन अब तीन प्रकारके सुखको भी तुम मेरेसे सुनो। जिसमें अभ्याससे रमण होता है और जिससे दुःखोंका अन्त हो जाता है? ऐसा वह परमात्मविषयक बुद्धिकी प्रसन्नतासे पैदा होनेवाला जो सुख (सांसारिक आसक्तिके कारण) आरम्भमें विषकी तरह और परिणाममें अमृतकी तरह होता है? वह सुख सात्त्विक कहा गया है।

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