Shrimad Bhagwat Geeta Shlok Chapter – 1 Shlok – 35॥ श्रीमद्भागवत गीता श्लोक प्रथम अध्याय- पञ्चत्रिंशत् श्लोक ॥

 

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Geeta Shlok/Lyrics Name : एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ।
etaann hantumichchhaami ghnatopi madhusoodan .api trailokyaraajyasy hetoh kin nu maheekrte .
Album Name : Shrimad Bhgwat Geeta Mahakavya
Published Year : 2016
File Size : 66 Kb Time Duration : 0:16 Min



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एतान्न हन्तुमिच्छामि घ्नतोऽपि मधुसूदन ।
अपि त्रैलोक्यराज्यस्य हेतोः किं नु महीकृते ।।1.35।।

॥ श्लोक का अर्थ ॥

।।1.34 1.35।। (टिप्पणी प0 24.1) आचार्य? पिता?
पुत्र और उसी प्रकार पितामह? मामा? ससुर? पौत्र?
साले तथा अन्य जितने भी सम्बन्धी हैं? मुझपर प्रहार
करनेपर भी मैं इनको मारना नहीं चाहता? और हे मधुसूदन
मुझे त्रिलोकीका राज्य मिलता हो? तो भी मैं इनको मारना
नहीं चाहता? फिर पृथ्वीके लिये तो मैं इनको मारूँ ही क्या |

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