Tag: तेषु रमते बुधः

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-22 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – द्वाविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-22 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – द्वाविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक - Geeta Shlok's With Hindi Meaning
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK22 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥ye hi sansparshaja bhoga duhkhayonay ev te . aadyantavantah kauntey na teshu ramate budhah . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 66 Kb Time Duration : 0:16 Min View In English Lyrics ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते । आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ।।5.22।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.22।। क्योंकि हे कुन्ती नन्दन जो इन्द्रियों और विषयों के संयोग से पैदा होने वाले भोग (सुख) हैं वे आदि अन्त वाले और दुःख के ही कारण हैं । अतः विवेकशील मनुष्य उनमें रमण नहीं करता । ...