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Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-57॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –सप्तपञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-57॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –सप्तपञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:चेतसा सर्वकर्माणि मयि संन्यस्य मत्परः।chetasa sarvakarmaani mayi sannyasy matparah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English चेतसा सर्वकर्माणि मयि संन्यस्य मत्परः। बुद्धियोगमुपाश्रित्य मच्चित्तः सततं भव।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ चित्तसे सम्पूर्ण कर्म मुझमें अर्पण करके? मेरे परायण होकर तथा समताका आश्रय लेकर निरन्तर मुझमें चित्तवाला हो जा। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-56॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – षट्पञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-56॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – षट्पञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः।sarvakarmaanyapi sada kurvaano madvyapaashrayah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17   View In English सर्वकर्माण्यपि सदा कुर्वाणो मद्व्यपाश्रयः। मत्प्रसादादवाप्नोति शाश्वतं पदमव्ययम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ मेरा आश्रय लेनेवाला भक्त सदा सब कर्म करता हुआ भी मेरी कृपासे शाश्वत अविनाशी पदको प्राप्त हो जाता है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-55॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –पञ्चपञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-55॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –पञ्चपञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः।bhaktya maamabhijaanaati yaavaanyashchaasmi tattvatah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English भक्त्या मामभिजानाति यावान्यश्चास्मि तत्त्वतः। ततो मां तत्त्वतो ज्ञात्वा विशते तदनन्तरम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ उस पराभक्तिसे मेरेको? मैं जितना हूँ और जो हूँ -- इसको तत्त्वसे जान लेता है तथा मेरेको तत्त्वसे जानकर फिर तत्काल मेरेमें प्रविष्ट हो जाता है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-54॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –चतुःपञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-54॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –चतुःपञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति।brahmabhootah prasannaatma na shochati na kaankshati. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:67Kb: Time Duration:00:17 View In English ब्रह्मभूतः प्रसन्नात्मा न शोचति न काङ्क्षति। समः सर्वेषु भूतेषु मद्भक्तिं लभते पराम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ वह ब्रह्मभूतअवस्थाको प्राप्त प्रसन्न मनवाला साधक न तो किसीके लिये शोक करता है और न किसीकी इच्छा करता है। ऐसा सम्पूर्ण प्राणियोंमें समभाववाला साधक मेरी पराभक्तिको प्राप्त हो जाता है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-53॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – त्रिपञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-53॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – त्रिपञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम्।ahankaaran balan darpan kaaman krodhan parigraham. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English अहङ्कारं बलं दर्पं कामं क्रोधं परिग्रहम्। विमुच्य निर्ममः शान्तो ब्रह्मभूयाय कल्पते।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जो विशुद्ध (सात्त्विकी) बुद्धिसे युक्त? वैराग्यके आश्रित? एकान्तका सेवन करनेवाला और नियमित भोजन करनेवाला साधक धैर्यपूर्वक इन्द्रियोंका नियमन करके? शरीरवाणीमनको वशमें करके? शब्दादि विषयोंका त्याग करके और रागद्वेषको छोड़कर निरन्तर ध्यानयोगके परायण हो जाता है? वह अहंकार? बल? दर्प? काम? क्रोध और परिग्रहका त्याग करके एवं निर्मम तथा...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-52॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –द्विपञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-52॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –द्विपञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः।viviktasevee laghvaashee yatavaakkaayamaanasah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English विविक्तसेवी लघ्वाशी यतवाक्कायमानसः। ध्यानयोगपरो नित्यं वैराग्यं समुपाश्रितः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जो विशुद्ध (सात्त्विकी) बुद्धिसे युक्त? वैराग्यके आश्रित? एकान्तका सेवन करनेवाला और नियमित भोजन करनेवाला साधक धैर्यपूर्वक इन्द्रियोंका नियमन करके? शरीरवाणीमनको वशमें करके? शब्दादि विषयोंका त्याग करके और रागद्वेषको छोड़कर निरन्तर ध्यानयोगके परायण हो जाता है? वह अहंकार? बल? दर्प? काम? क्रोध और परिग्रहका त्याग करके एवं निर्मम तथा शान्त होकर ब्रह्...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-51॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –एकपञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-51॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –एकपञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्याऽऽत्मानं नियम्य च।buddhya vishuddhaya yukto dhrtyaatmaanan niyamy ch. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English बुद्ध्या विशुद्धया युक्तो धृत्याऽऽत्मानं नियम्य च। शब्दादीन् विषयांस्त्यक्त्वा रागद्वेषौ व्युदस्य च।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जो विशुद्ध (सात्त्विकी) बुद्धिसे युक्त? वैराग्यके आश्रित? एकान्तका सेवन करनेवाला और नियमित भोजन करनेवाला साधक धैर्यपूर्वक इन्द्रियोंका नियमन करके? शरीरवाणीमनको वशमें करके? शब्दादि विषयोंका त्याग करके और रागद्वेषको छोड़कर निरन्तर ध्यानयोगके परायण हो जाता है? वह अहंकार? बल? दर्प? काम? क्रोध और परिग्रहका...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-50॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – पञ्चाशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-50॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – पञ्चाशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे।siddhin praapto yatha brahm tathaapnoti nibodh me. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:69Kb: Time Duration:00:17 View In English सिद्धिं प्राप्तो यथा ब्रह्म तथाप्नोति निबोध मे। समासेनैव कौन्तेय निष्ठा ज्ञानस्य या परा।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे कौन्तेय सिद्धि(अन्तःकरणकी शुद्धि) को प्राप्त हुआ साधक ब्रह्मको? जो कि ज्ञानकी परा निष्ठा है? जिस प्रकारसे प्राप्त होता है? उस प्रकारको तुम मुझसे संक्षेपमें ही समझो। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-49॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –नवचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-49॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –नवचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:असक्तबुद्धिः सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृहः।asaktabuddhih sarvatr jitaatma vigatasprhah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:69Kb: Time Duration:00:17 View In English असक्तबुद्धिः सर्वत्र जितात्मा विगतस्पृहः। नैष्कर्म्यसिद्धिं परमां संन्यासेनाधिगच्छति।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जिसकी बुद्धि सब जगह आसक्तिरहित है? जिसने शरीरको वशमें कर रखा है? जो स्पृहारहित है? वह मनुष्य सांख्ययोगके द्वारा नैष्कर्म्यसिद्धिको प्राप्त हो जाता है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-48॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –अष्टचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-48॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –अष्टचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्।sahajan karm kauntey sadoshamapi na tyajet. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English सहजं कर्म कौन्तेय सदोषमपि न त्यजेत्। सर्वारम्भा हि दोषेण धूमेनाग्निरिवावृताः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे कुन्तीनन्दन दोषयुक्त होनेपर भी सहज कर्मका त्याग नहीं करना चाहिये क्योंकि सम्पूर्ण कर्म धुएँसे अग्निकी तरह किसीनकिसी दोषसे युक्त हैं। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-47॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – सप्तचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-47॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – सप्तचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्।shreyaansvadharmo vigunah paradharmaatsvanushthitaat. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English श्रेयान्स्वधर्मो विगुणः परधर्मात्स्वनुष्ठितात्। स्वभावनियतं कर्म कुर्वन्नाप्नोति किल्बिषम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ अच्छी तरहसे अनुष्ठान किये हुए परधर्मसे गुणरहित अपना धर्म श्रेष्ठ है। कारण कि स्वभावसे नियत किये हुए स्वधर्मरूप कर्मको करता हुआ मनुष्य पापको प्राप्त नहीं होता। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-46॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –षट्चत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-46॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –षट्चत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्।yatah pravrttirbhootaanaan yen sarvamidan tatam. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:67Kb: Time Duration:00:17 View In English यतः प्रवृत्तिर्भूतानां येन सर्वमिदं ततम्। स्वकर्मणा तमभ्यर्च्य सिद्धिं विन्दति मानवः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जिस परमात्मासे सम्पूर्ण प्राणियोंकी उत्पत्ति होती है और जिससे यह सम्पूर्ण संसार व्याप्त है? उस परमात्माका अपने कर्मके द्वारा पूजन करके मनुष्य सिद्धिको प्राप्त हो जाता है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-45॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –पञ्चचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-45॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –पञ्चचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः।sve sve karmanyabhiratah sansiddhin labhate narah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:67Kb: Time Duration:00:16 View In English स्वे स्वे कर्मण्यभिरतः संसिद्धिं लभते नरः। स्वकर्मनिरतः सिद्धिं यथा विन्दति तच्छृणु।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ अपनेअपने कर्ममें तत्परतापूर्वक लगा हुआ मनुष्य सम्यक् सिद्धि (परमात्मा)को प्राप्त कर लेता है। अपने कर्ममें लगा हुआ मनुष्य जिस प्रकार सिद्धिको प्राप्त होता है? उस प्रकारको तू मेरेसे सुन। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-44॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –चतुश्चत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-44॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –चतुश्चत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम्।krshigaurakshyavaanijyan vaishyakarm svabhaavajam. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:67Kb: Time Duration:00:17 View In English कृषिगौरक्ष्यवाणिज्यं वैश्यकर्म स्वभावजम्। परिचर्यात्मकं कर्म शूद्रस्यापि स्वभावजम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ खेती करना? गायोंकी रक्षा करना और शुद्ध व्यापार करना -- ये सबकेसब वैश्यके स्वाभाविक कर्म हैं? तथा चारों वर्णोंकी सेवा करना शूद्रका भी स्वाभाविक कर्म है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-43॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –त्रिचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-43॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –त्रिचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्।shauryan tejo dhrtirdaakshyan yuddhe chaapyapalaayanam. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English शौर्यं तेजो धृतिर्दाक्ष्यं युद्धे चाप्यपलायनम्। दानमीश्वरभावश्च क्षात्रं कर्म स्वभावजम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ शूरवीरता? तेज? धैर्य? प्रजाके संचालन आदिकी विशेष चतुरता? युद्धमें कभी पीठ न दिखाना? दान करना और शासन करनेका भाव -- ये सबकेसब क्षत्रियके स्वाभाविक कर्म हैं। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-42॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – द्विचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-42॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – द्विचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च।shamo damastapah shauchan kshaantiraarjavamev ch. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English शमो दमस्तपः शौचं क्षान्तिरार्जवमेव च। ज्ञानं विज्ञानमास्तिक्यं ब्रह्मकर्म स्वभावजम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ मनका निग्रह करना इन्द्रियोंको वशमें करना धर्मपालनके लिये कष्ट सहना बाहरभीतरसे शुद्ध रहना दूसरोंके अपराधको क्षमा करना शरीर? मन आदिमें सरलता रखना वेद? शास्त्र आदिका ज्ञान होना यज्ञविधिको अनुभवमें लाना और परमात्मा? वेद आदिमें आस्तिक भाव रखना -- ये सबकेसब ब्राह्मणके स्वाभाविक कर्म हैं। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-41॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – एकचत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-41॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – एकचत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परंतप।braahmanakshatriyavishaan shoodraanaan ch parantap. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:67Kb: Time Duration:00:17 View In English ब्राह्मणक्षत्रियविशां शूद्राणां च परंतप। कर्माणि प्रविभक्तानि स्वभावप्रभवैर्गुणैः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे परंतप ब्राह्मण? क्षत्रिय? वैश्य और शूद्रोंके कर्म स्वभावसे उत्पन्न हुए तीनों गुणोंके द्वारा विभक्त किये गये हैं। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-40॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –चत्वारिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-40॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –चत्वारिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा पुनः।na tadasti prthivyaan va divi deveshu va punah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English न तदस्ति पृथिव्यां वा दिवि देवेषु वा पुनः। सत्त्वं प्रकृतिजैर्मुक्तं यदेभिः स्यात्ित्रभिर्गुणैः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ पृथ्वीमें या स्वर्गमें अथवा देवताओंमें इनके सिवाय और कहीं भी वह ऐसी कोई वस्तु नहीं है? जो प्रकृतिसे उत्पन्न इन तीनों गुणोंसे रहित हो। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-39॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –नवत्रिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-39॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –नवत्रिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः।yadagre chaanubandhe ch sukhan mohanamaatmanah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English यदग्रे चानुबन्धे च सुखं मोहनमात्मनः। निद्रालस्यप्रमादोत्थं तत्तामसमुदाहृतम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ निद्रा? आलस्य और प्रमादसे उत्पन्न होनेवाला जो सुख आरम्भमें और परिणाममें अपनेको मोहित करनेवाला है? वह सुख तामस कहा गया है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-38॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –अष्टत्रिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-38॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय –अष्टत्रिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम्।vishayendriyasanyogaadyattadagremrtopamam. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:67kb: Time Duration:00:16 View In English विषयेन्द्रियसंयोगाद्यत्तदग्रेऽमृतोपमम्। परिणामे विषमिव तत्सुखं राजसं स्मृतम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जो सुख इन्द्रियों और विषयोंके संयोगसे आरम्भमें अमृतकी तरह और परिणाममें विषकी तरह होता है? वह सुख राजस कहा गया है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-37॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – सप्तत्रिंशत् श्लोक॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-18 Shlok-37॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक अष्टादश अध्याय – सप्तत्रिंशत् श्लोक॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER18SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्।yattadagre vishamiv parinaamemrtopamam. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English यत्तदग्रे विषमिव परिणामेऽमृतोपमम्। तत्सुखं सात्त्विकं प्रोक्तमात्मबुद्धिप्रसादजम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे भरतवंशियोंमें श्रेष्ठ अर्जुन अब तीन प्रकारके सुखको भी तुम मेरेसे सुनो। जिसमें अभ्याससे रमण होता है और जिससे दुःखोंका अन्त हो जाता है? ऐसा वह परमात्मविषयक बुद्धिकी प्रसन्नतासे पैदा होनेवाला जो सुख (सांसारिक आसक्तिके कारण) आरम्भमें विषकी तरह और परिणाममें अमृतकी तरह होता है? वह सुख सात्त्विक कहा गया है। ...