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Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-10 Shlok-6॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक  दशम अध्याय –षष्टम श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-10 Shlok-6॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक दशम अध्याय –षष्टम श्लोक ॥

गीता श्लोक
BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER10SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा महान्।maharshayah sapt poorve chatvaaro manavastatha. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Published Year : 2016 File Size:68Kb: Time Duration:00:17 View In English महर्षयः सप्त पूर्वे चत्वारो मनवस्तथा। मद्भावा मानसा जाता येषां लोक इमाः प्रजाः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।सात महर्षि और उनसे भी पूर्वमें होनेवाले चार सनकादि तथा चौदह मनु -- ये सबकेसब मेरे मनसे पैदा हुए हैं और मेरेमें भाव (श्रद्धाभक्ति) रखनेवाले हैं? जिनकी संसारमें यह सम्पूर्ण प्रजा है। । ...
Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-13 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय त्रयोदशन् श्लोक

Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-13 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय त्रयोदशन् श्लोक

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिर|saman kaay shiro greev dhaarayannachalan sthir Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:311Kb Time Duration :00:18 View In English Lyrics समं कायशिरोग्रीवं धारयन्नचलं स्थिरः संप्रेक्ष्य नासिकाग्रं स्वं दिशश्चानवलोकयन् ॥ श्लोक का अर्थ ॥ बाह्य आसनका वर्णन किया अब शरीरको कैसे रखना चाहिये सो कहते हैं काया शिर और गरदनको सम और अचल भावसे धारण करके स्थिर होकर बैठे। समानभावसे धारण किये हुए कायादिका भी चलन होना सम्भव है इसलिये अचलम् यह विशेषण दिया गया है। तथा अपनी नासिकाके अग्रभागको देखता हुआ यानी मानो वह उधर ही अच्छी तरह देख रहा है। इस प्रकार दृष्टि करके। यहाँ...
Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-12 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय द्वादशन् श्लोक

Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-12 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय द्वादशन् श्लोक

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रिय|tatraikaagran manah krtva yatachittendriy kriy Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:320Kb Time Duration:00:18   ViewInEnglish Lyrics तत्रैकाग्रं मनः कृत्वा यतचित्तेन्द्रियक्रियः उपविश्यासने युञ्ज्याद्योगमात्मविशुद्धये ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ( आसनको ) स्थिर स्थापन करके क्या करे ( सो कहते हैं ) उस आसनर बैठकर योगका साधन करे। कैसे करे मनको सब विषयोंसे हटाकर एकाग्र करके तथा यतचित्तेन्द्रियक्रिय यानी चित्त और इन्द्रियोंकी क्रियाओंको जीतनेवाला होकर योगका साधन करे। जिसने मन और इन्द्रियोंकी क्रियाओंका संयम कर लिया हो उसको यतचित्तेन्द्रियक्रिय...
Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-11 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय  एकादश श्लोक

Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-11 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय एकादश श्लोक

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मन|shuchau deshe pratishthaapy sthiramaasanamaatman Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:315Kb Time Duration:00:18   View In English Lyrics शुचौ देशे प्रतिष्ठाप्य स्थिरमासनमात्मन नात्युच्छ्रितं नातिनीचं चैलाजिनकुशोत्तरम ॥ श्लोक का अर्थ ॥ योगाभ्यास करनेवालेके लिये योगके साधनरूप आसन आहार और विहार आदिका नियम बतलाना उचित है एवं योगको प्राप्त हुए पुरुषका लक्षण और उसका फल आदि भी कहना चाहिये। इसलिये अब ( यह प्रकरण ) आरम्भ किया जाता है। उसमें पहले आसनका ही वर्णन करते हैं शुद्ध स्थानमें अर्थात् जो स्वभावसे अथवा झाड़नेबुहारने आदि संस्कारोंसे साफ कि...
Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-5 श्रीमदभगवद गीता  षष्टम अध्याय पंचम श्लोक

Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-5 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय पंचम श्लोक

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। Ud'dharēdātmanā̕̕tmānaṁ nātmānamavasādayēt. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:68Kb Time Duration :00 17 View In English Lyrics उद्धरेदात्मनाऽऽत्मानं नात्मानमवसादयेत्। आत्मैव ह्यात्मनो बन्धुरात्मैव रिपुरात्मनः।।6.5।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जब मनुष्य इस प्रकार योगारूढ़ हो जाता है तब वह अनर्थोंके समूह इस संसारसमुद्रसे स्वयं अपना उद्धार कर लेता है इसलिये संसारसागरमें डूबे पड़े हुए अपनेआपको उस संसारसमुद्रसे आत्मबलके द्वारा ऊँचा उठा लेना चाहिये अर्थात् योगारूढ़ अवस्थाको प्राप्त कर लेना चाहिये। अपना अधःपतन नहीं करना चाहिये अर्थात् अपने आत्माको नी...
Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-4 श्रीमदभगवद गीता  षष्टम अध्याय चतुर्थ श्लोक

Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-4 श्रीमदभगवद गीता षष्टम अध्याय चतुर्थ श्लोक

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name: यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते।yada hi nendriyaartheshu na karmasvanushajjate. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:31Kb Time Duration : 00:16:00 View In English Lyrics यदा हि नेन्द्रियार्थेषु न कर्मस्वनुषज्जते। सर्वसङ्कल्पसंन्यासी योगारूढस्तदोच्यते।।6.4।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जब (साधक) न इन्द्रियों के विषयों में और न कर्मों में आसक्त होता है तब सर्व संकल्पों के संन्यासी को योगारूढ़ कहा जाता है।। ...
Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6  Shlok-1 श्रीमदभगवद गीता श्लोक षष्टम अध्याय प्रथम श्लोक

Shrimad Bhagwad Gita Chapter – 6 Shlok-1 श्रीमदभगवद गीता श्लोक षष्टम अध्याय प्रथम श्लोक

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK1 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:श्री भगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः।shree bhagavaanuvaachanaashritah karmaphalan kaaryan karm karoti yah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:82KB Time Duration :00:24:00 View In English Lyrics मूल श्लोकः श्री भगवानुवाच अनाश्रितः कर्मफलं कार्यं कर्म करोति यः। स संन्यासी च योगी च न निरग्निर्न चाक्रियः।।6.1।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ श्रीभगवान् ने कहा जो पुरुष कर्मफल पर आश्रित न होकर कर्तव्य कर्म करता है वह संन्यासी और योगी है न कि वह जिसने केवल अग्नि का और क्रियायों का त्याग किया है।। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-29 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – नवविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-29 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – नवविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK29 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ॥ bhoktaaran yagyatapasaan sarvalokamaheshvaram . suhrdan sarvabhootaanaan gyaatva maan . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 68 Kb Time Duration : 0:17 Min   View In English Lyrics भोक्तारं यज्ञतपसां सर्वलोकमहेश्वरम् । सुहृदं सर्वभूतानां ज्ञात्वा मां शान्तिमृच्छति ।।5.29।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.29।। भक्त मुझे सब यज्ञों और तपों का भोक्ता सम्पूर्ण लोकों का महान् ईश्वर तथा सम्पूर्ण प्राणियों का सुहृद् (स्वार्थरहित दयालु और प्रेमी) जानकर शान्ति को प्राप्त हो जाता है । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-28 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – अष्टाविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-28 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – अष्टाविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK28 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥ yatendriyamanobuddhirmunirmokshaparaayanah . vigatechchhaabhayakrodho yah sada mukt ev sah . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 69 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः । विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ।।5.28।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.27 5.28।। बाह्य पदार्थों को बाहर ही छोड़ कर और नेत्रों की दृष्टि को भौंहों के बीच में स्थित करके तथा नासिका में विचरने वाले प्राण और अपान वायु को सम करके जिसकी इन्द्रियाँ मन और बुद्धि अपने वश में हैं जो मोक्ष परा...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-27 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – सप्तविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-27 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – सप्तविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK27 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भ्रुवोः प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ॥ sparshaankrtva bahirbaahyaanshchakshushchaivaantare bhruvoh . praanaapaanau samau krtva . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 71 Kb Time Duration : 0:18 Min View In English Lyrics स्पर्शान्कृत्वा बहिर्बाह्यांश्चक्षुश्चैवान्तरे भ्रुवोः । प्राणापानौ समौ कृत्वा नासाभ्यन्तरचारिणौ ।।5.27।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.27 5.28।। बाह्य पदार्थों को बाहर ही छोड़ कर और नेत्रों की दृष्टि को भौंहों के बीच में स्थित करके तथा नासिका में विचरने वाले प्राण और अपान वायु को सम करके जिसकी इन्द्रियाँ मन और ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-26 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – षड्विंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-26 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – षड्विंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK26 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम् ॥ kaamakrodhaviyuktaanaan yateenaan yatachetasaam.abhito brahmanirvaanan vartate viditaat . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 68 kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics कामक्रोधवियुक्तानां यतीनां यतचेतसाम् । अभितो ब्रह्मनिर्वाणं वर्तते विदितात्मनाम ।।5.26।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.26।। काम क्रोध से सर्वथा रहित जीते हुए मन वाले और स्वरूप का साक्षात्कार किये हुए सांख्य योगियों के लिये दोनों ओर से शरीर के रहते हुए अथवा शरीर छूटने के बाद निर्वाण ब्रह्म परिपूर्ण है । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-25 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – पञ्चविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-25 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – पञ्चविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK25 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ॥ labhante brahmanirvaanamrshayah ksheenakalmashaah.chhinnadvaidha yataatmaanah sarvabhootah . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 69 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics लभन्ते ब्रह्मनिर्वाणमृषयः क्षीणकल्मषाः । छिन्नद्वैधा यतात्मानः सर्वभूतहिते रताः ।।5.25।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.25।। जिनका शरीर मन बुद्धि इन्द्रियों सहित वश में है जो सम्पूर्ण प्राणियों के हित में रत हैं जिनके सम्पूर्ण संशय मिट गये हैं जिनके सम्पूर्ण कल्मष (दोष) नष्ट हो गये हैं वे विवेकी साधक निर्वाण ब्रह्म को प्राप्त ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-24 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – चतुर्विंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-24 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – चतुर्विंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK24 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ॥ yontahsukhontaraaraamastathaantarjyotirev yah . sa yogee brahmanirvaanan . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 68 Kb Time Duration : 0:17 Min   View In English Lyrics योऽन्तःसुखोऽन्तरारामस्तथान्तर्ज्योतिरेव यः । स योगी ब्रह्मनिर्वाणं ब्रह्मभूतोऽधिगच्छति ।।5.24।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.24।। जो मनुष्य केवल परमात्मा में सुख वाला है और केवल परमात्मा में रमण करने वाला है तथा जो केवल परमात्मा में ज्ञान वाला है वह ब्रह्म में अपनी स्थिति का अनुभव करने वाला सांख्य योगी निर्वाण ब्रह्म को प्...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-23 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – त्रयोविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-23 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – त्रयोविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK23 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ॥ shaknoteehaiv yah sodhun praakshareeravimokshanaat.kaamakrodhodbhavan vegan sa yuktah sa. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 67 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics शक्नोतीहैव यः सोढुं प्राक्शरीरविमोक्षणात् । कामक्रोधोद्भवं वेगं स युक्तः स सुखी नरः ।।5.23।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.23।। इस मनुष्य शरीर में जो कोई (मनुष्य) शरीर छूटने से पहले ही काम क्रोध से उत्पन्न होने वाले वेग को सहन करने में समर्थ होता है वह नर योगी है और वही सुखी है । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-22 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – द्वाविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-22 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – द्वाविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK22 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ॥ye hi sansparshaja bhoga duhkhayonay ev te . aadyantavantah kauntey na teshu ramate budhah . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 66 Kb Time Duration : 0:16 Min View In English Lyrics ये हि संस्पर्शजा भोगा दुःखयोनय एव ते । आद्यन्तवन्तः कौन्तेय न तेषु रमते बुधः ।।5.22।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.22।। क्योंकि हे कुन्ती नन्दन जो इन्द्रियों और विषयों के संयोग से पैदा होने वाले भोग (सुख) हैं वे आदि अन्त वाले और दुःख के ही कारण हैं । अतः विवेकशील मनुष्य उनमें रमण नहीं करता । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-21 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – एकाविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-21 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – एकाविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK21 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते ॥ baahyasparsheshvasaktaatma vindatyaatmani yatsukham . sa brahmayogayuktaatma . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 68 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics बाह्यस्पर्शेष्वसक्तात्मा विन्दत्यात्मनि यत्सुखम् । स ब्रह्मयोगयुक्तात्मा सुखमक्षयमश्नुते ।।5.21।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.21।। बाह्य स्पर्श में आसक्ति रहित अन्तःकरण वाला साधक आत्मा में जो सुख है उसको प्राप्त होता है । फिर वह ब्रह्म में अभिन्न भाव से स्थित मनुष्य अक्षय सुख का अनुभव करता है । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-20 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – विंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-20 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – विंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK20 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद्ब्रह्मणि स्थितः॥ na prahrshyetpriyan praapy nodvijetpraapy chaapriyam .sthirabuddhirasammoodho brahmavidbrahmani. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 68 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics न प्रहृष्येत्प्रियं प्राप्य नोद्विजेत्प्राप्य चाप्रियम् । स्थिरबुद्धिरसम्मूढो ब्रह्मविद्ब्रह्मणि स्थितः ।।5.20।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.20।। जो प्रिय को प्राप्त होकर हर्षित न हो और अप्रिय को प्राप्त होकर उद्विग्न न हो वह स्थिर बुद्धि वाला मूढ़ता रहित तथा ब्रह्म को जानने वाला मनुष्य ब्रह्म में...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-19 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – नवदशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-19 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – नवदशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK19 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः॥ ihaiv tairjitah sargo yeshaan saamye sthitan manah.nirdoshan hi saman brahm tasmaadbrahmani. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 69 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics इहैव तैर्जितः सर्गो येषां साम्ये स्थितं मनः । निर्दोषं हि समं ब्रह्म तस्माद्ब्रह्मणि ते स्थिताः ।।5.19।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.19।। जिनका अन्तःकरण समता में स्थित है उन्होंने इस जीवित अवस्था में ही सम्पूर्ण संसार को जीत लिया है क्योंकि ब्रह्म निर्दोष और सम है इसलिये वे ब्रह्म में ही स्थित हैं । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-18 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – अष्टादशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-18 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – अष्टादशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK18 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : विद्याविनयसंपन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ॥vidyaavinayasampanne braahmane gavi hastini.shuni chaiv shvapaake ch panditaah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 66 Kb Time Duration : 0:16 Min View In English Lyrics विद्याविनयसंपन्ने ब्राह्मणे गवि हस्तिनि । शुनि चैव श्वपाके च पण्डिताः समदर्शिनः ।।5.18।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.18।। ज्ञानी महापुरुष विद्या विनय युक्त ब्राह्मण में और चाण्डाल में तथा गाय हाथी एवं कुत्ते में भी समरूप परमात्मा को देखने वाले होते हैं । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-17 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – सप्तदशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-17 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – सप्तदशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK17 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ॥ tadbuddhayastadaatmaanastannishthaastatparaayanaah.gachchhantyapunaraavrttin. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 70 Kb Time Duration : 0:18 Min View In English Lyrics तद्बुद्धयस्तदात्मानस्तन्निष्ठास्तत्परायणाः । गच्छन्त्यपुनरावृत्तिं ज्ञाननिर्धूतकल्मषाः ।।5.17।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.17।। जिनकी बुद्धि तदाकार हो रही है जिनका मन तदाकार हो रहा है जिनकी स्थिति परमात्म तत्व में है ऐसे परमात्म परायण साधक ज्ञान के द्वारा पाप रहित होकर अपुनरा वृत्ति (परम गति) को प्राप्त होते हैं । ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-16 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – षोडशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-16 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – षोडशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK16 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ॥gyaanen tu tadagyaanan yeshaan naashitamaatmanah.teshaamaadityavajgyaanan prakaashayati tatparam. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 66 Kb Time Duration : 0:16 Min View In English Lyrics ज्ञानेन तु तदज्ञानं येषां नाशितमात्मनः । तेषामादित्यवज्ज्ञानं प्रकाशयति तत्परम् ।।5.16।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.16।। परन्तु जिन्होंने अपने जिस ज्ञान(विवेक) के द्वारा उस अज्ञान का नाश कर दिया है उनका वह ज्ञान सूर्य की तरह परम तत्त्व परमात्मा को प्रकाशित कर देता है । ...