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Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-44 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –चतुश्चत्वारिंशत्  श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-44 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –चतुश्चत्वारिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोऽपि सः।poorvaabhyaasen tenaiv hriyate hyavashopi sah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:339Kb Time Duration:00:19 View In English Lyrics पूर्वाभ्यासेन तेनैव ह्रियते ह्यवशोऽपि सः। जिज्ञासुरपि योगस्य शब्दब्रह्मातिवर्तते।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ पहले शरीरकी बुद्धिसे उसका संयोग कैसे होता है सो कहते हैं क्योंकि वह योगभ्रष्ट पुरुष परवश हुआ भी पूर्वाभ्यासके द्वारा अर्थात् जो पहले जन्ममें किया हुआ अभ्यास है उस अति बलवान् पूर्वाभ्यासके द्वारा योगकी ओर खींच लिया जाता है। यदि योगाभ्यासके संस्कारोंकी अपेक्षा अधिक बलवान् अधर्मादि कर्म न किये हों तो वह योगाभ्यासजनित स...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-43 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –त्रिचत्वारिंशत्  श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-43 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –त्रिचत्वारिंशत् श्लोक ॥

New Hindi Bhajan Lyrics, गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्|tatr tan buddhisanyogan labhate paurvadehikam Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:299Kb Time Duration:00:17   ViewIn English Lyrics तत्र तं बुद्धिसंयोगं लभते पौर्वदेहिकम्। यतते च ततो भूयः संसिद्धौ कुरुनन्दन ॥ श्लोक का अर्थ ॥ क्योंकि वहाँ योगियोंके कुलमें पहले शरीरमें होनेवाले उस बुद्धिके संयोगको पाता है अर्थात् योगीकुलमें जन्म लेते ही उसका पूर्वजन्ममें प्राप्त हुई बुद्धिसे सम्बन्ध हो जाता है और हे कुरुनन्दन वह उस पूर्वकृत संस्कारके बलसे पूर्ण सिद्धि प्राप्त करनेके लिये फिर और भी अधिक प्रयत्न करता है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-42 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – द्विचत्वारिंशत् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-42 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – द्विचत्वारिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम्।athava yoginaamev kule bhavati dheemataam. Album Name: Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:240Kb Time Duration:13 View In English Lyrics अथवा योगिनामेव कुले भवति धीमताम्। एतद्धि दुर्लभतरं लोके जन्म यदीदृशम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ अथवा श्रीमानोंके कुलसे अन्य जो बुद्धिमान् दरिद्र योगियोंका कुल है उसीमें जन्म ले लेता है। परंतु ऐसा जन्म अर्थात् जो उपर्युक्त दरिद्र आदि विशेषणोंसे युक्त योगियोंके कुलमें उत्पन्न होना है वह इस लोकमें पहले बतलाये हुए श्रीमानोंके कुलमें उत्पन्न होनेकी अपेक्षा अत्यन्त दुर्लभ है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-41 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –  एकचत्वारिंशत् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-41 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – एकचत्वारिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः।praapy punyakrtaan lokaanushitva shaashvateeh samaah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:374Kb Time Duration:00:22 View In English Lyrics प्राप्य पुण्यकृतां लोकानुषित्वा शाश्वतीः समाः। शुचीनां श्रीमतां गेहे योगभ्रष्टोऽभिजायते।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ तो फिर इस योगभ्रष्टका क्या होता है योगमार्गमें लगा हुआ योगभ्रष्ट संन्यासी पुण्यकर्म करनेवालोंके अर्थात् अश्वमेध आदि यज्ञ करनेवालोंके लोकोंमें जाकर वहाँ बहुत कालतक अर्थात् अनन्त वर्षोंतक वास करके उनके भोगका क्षय होनेपर शास्त्रोक्त कर्म करनेवाले शुद्ध और श्रीमान् पुरुषोंके घरमें जन्म लेता है। प्रकरण...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-40 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –  चत्वारिंशत् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-40 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – चत्वारिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:श्री भगवानुवाच पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते।shreebhagavaanuvaach paarth naiveh naamutr vinaashastasy vidyate. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:370Kb Time Duration:00:21 View In English Lyrics श्री भगवानुवाच पार्थ नैवेह नामुत्र विनाशस्तस्य विद्यते। नहि कल्याणकृत्कश्िचद्दुर्गतिं तात गच्छति ॥ श्लोक का अर्थ ॥ श्रीभगवान् बोले हे पार्थ उस योगभ्रष्ट पुरुषका इस लोकमें या परलोकमें कहीं भी नाश नहीं होता है। पहलेकी अपेक्षा हीनजन्मकी प्राप्तिका नाम नाश है सो ऐसी अवस्था योगभ्रष्टकी नहीं होती। क्योंकि हे तात शुभ कार्य करनेवाला कोई भी मनुष्य दुर्गतिको अर्थात् नीच गतिको नहीं पाता। पि...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-39 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –   नवत्रिंशत् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-39 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – नवत्रिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः।etanme sanshayan krshn chhettumarhasyasheshatah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:243Kb Time Duration:00:13 View In English Lyrics एतन्मे संशयं कृष्ण छेत्तुमर्हस्यशेषतः। त्वदन्यः संशयस्यास्य छेत्ता न ह्युपपद्यते।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे कृष्ण मेरे इस संशयको निःशेषतासे काटनेके लिये अर्थात् नष्ट करनेके लिये आप हीसमर्थ हैं क्योंकि आपको छोड़कर दूसरा कोई ऋषि या देवता इस संशयका नाश करनेवाला सम्भव नहीं है। अतः आपको ही इसका नाश करना चाहिये यह अभिप्राय है। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-37 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – सप्तत्रिंशत्  श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-37 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – सप्तत्रिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:अर्जुन उवाच अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः।arjun uvaach aayati shraddhayopeto yogaachchalitamaanasah. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:335Kb Time Duration:00:19 ViewIn EnglishLyrics अर्जुन उवाच अयतिः श्रद्धयोपेतो योगाच्चलितमानसः। अप्राप्य योगसंसिद्धिं कां गतिं कृष्ण गच्छति।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ योगाभ्यासको स्वीकार करके जिसने इस लोक और परलोककी प्राप्तिके साधनरूप कर्मोंका तो त्याग कर दिया और योगसिद्धिका फल मोक्षप्राप्तिका साधन पूर्ण ज्ञान जिसको मिला नहीं ऐसे जिस योगीका चित्त अन्तकालमें योगमार्गसे विचलित हो गया हो उस योगीके नाशकी आशङ्का करके अर्जुन पूछने लगा हे कृष्ण जो साधक योगम...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-34 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –चतुस्त्रिंशत् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-34 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –चतुस्त्रिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्।chanchalan hi manah krshn pramaathi balavaddrdham. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:255Kb Time Duration:00:14 View In English Lyrics चञ्चलं हि मनः कृष्ण प्रमाथि बलवद्दृढम्। तस्याहं निग्रहं मन्ये वायोरिव सुदुष्करम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ क्योंकि हे कृष्ण यह मन बड़ा ही चञ्चल है। विलेखनके अर्थमें जो कृष धातु है उसका रूप कृष्ण है। भक्तजनोंके पापादि दोषोंको निवृत्त करनेवाले होनेके कारण भगवान्का नाम कृष्ण है। यह मन केवल अत्यन्त चञ्चल है इतना ही नही किंतु प्रमथनशील भी है अर्थात् शरीरको क्षुब्ध और इन्द्रियोंको विक्षिप्त यानी परवश कर देता है। तथा बड़ा बलव...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-32 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –द्वात्रिंशत्  श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-32 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –द्वात्रिंशत् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन।aatmaupamyen sarvatr saman pashyati yorjun. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:317Kb Time Duration:00:18 ViewInEnglish आत्मौपम्येन सर्वत्र समं पश्यति योऽर्जुन। सुखं वा यदि वा दुःखं सः योगी परमो मतः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ तथा और भी कहते हैं आत्मा अर्थात् स्वयं आप और जिसके द्वारा उपमित किया जाय वह उपमा उस उपमाके भावको ( सादृश्यको ) औपम्य कहते हैं। हे अर्जुन उस आत्मौपम्यद्वारा अर्थात् अपनी सदृशतासे जो योगी सर्वत्र सब भूतोंमें तुल्य देखता है। वह तुल्य क्या देखता है सो कहते हैं जैसे मुझे सुख प्रिय है वैसे ही सभी प्राणियोंको सुख अनुकूल है और जैसे दुःख म...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-27 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – सप्तविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-27 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – सप्तविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम्।prashaant maanasan hyenan yoginan sukh muttamam Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:314Kb Time Duration:00:18 View InEnglishLyrics प्रशान्तमनसं ह्येनं योगिनं सुखमुत्तमम्। उपैति शान्तरजसं ब्रह्मभूतमकल्मषम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ जिसका मन प्रशान्त है जो पापरहित (अकल्मषम्) है और जिसका रजोगुण (विक्षेप) शांत हुआ है ऐसे ब्रह्मरूप हुए इस योगी को उत्तम सुख प्राप्त होता है।। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-26 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – षड्विंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-26 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – षड्विंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्।yato yato nishcharati manashchanchalam sthiran Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:229Kb Time Duration:00:12   ViewInEnglishLyrics यतो यतो निश्चरति मनश्चञ्चलमस्थिरम्। ततस्ततो नियम्यैतदात्मन्येव वशं नयेत्।।।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ यह चंचल और अस्थिर मन जिन कारणों से (विषयों में) विचरण करता है उनसे संयमित करके उसे आत्मा के ही वश में लावे अर्थात् आत्मा में स्थिर करे।। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-25 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –पञ्चविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-25 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –पञ्चविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्।bheeshmadronapramukhatah sarveshaan ch maheekshitaam Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size: Time Duration : View In English Lyrics भीष्मद्रोणप्रमुखतः सर्वेषां च महीक्षिताम्। उवाच पार्थ पश्यैतान्समवेतान्कुरूनिति ॥ श्लोक का अर्थ ॥ >सञ्जय बोले हे भरतवंशी राजन् निद्राविजयी अर्जुनके द्वारा इस तरह कहनेपर अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्णने दोनों सेनाओंके मध्यभागमें पितामह भीष्म और आचार्य द्रोणके सामने तथा सम्पूर्ण राजाओंके सामने श्रेष्ठ रथको खड़ा करके इस तरह कहा कि हे पार्थ इन इकट्ठे हुए कुरुवंशियोंको देख। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-24 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –चतुर्विंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-24 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –चतुर्विंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:सञ्जय उवाच एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत।sanjay uvaach evamukto hrsheekesho gudaakeshen bhaarat. Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:246Kb Time Duration:00:13 ViewIn EnglishLyrics सञ्जय उवाच एवमुक्तो हृषीकेशो गुडाकेशेन भारत। सेनयोरुभयोर्मध्ये स्थापयित्वा रथोत्तमम्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ सञ्जय बोले हे भरतवंशी राजन् निद्राविजयी अर्जुनके द्वारा इस तरह कहनेपर अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्णने दोनों सेनाओंके मध्यभागमें पितामह भीष्म और आचार्य द्रोणके सामने तथा सम्पूर्ण राजाओंके सामने श्रेष्ठ रथको खड़ा करके इस तरह कहा कि हे पार्थ इन इकट्ठे हुए कुरुवंशियोंको देख। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-23 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –त्रयोविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-23 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय –त्रयोविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः।yotsyamaanaanavekshehan ya etetr samaagataah Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:215Kb Time Duration:00:18 ViewInEnglishLyrics योत्स्यमानानवेक्षेऽहं य एतेऽत्र समागताः। धार्तराष्ट्रस्य दुर्बुद्धेर्युद्धे प्रियचिकीर्षवः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ दुष्टबुद्धि दुर्योधनका युद्धमें प्रिय करनेकी इच्छावाले जो ये राजालोग इस सेनामें आये हुए हैं? युद्ध करनेको उतावले हुए इन सबको मैं देख लूँ। ...

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-20 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – विंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:अथ व्यवस्थितान् दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः।ath vyavasthitaan drshtva dhaartaraashtran kapidhvaj Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:356Kb Time Duration:00:21 View In English Lyrics अथ व्यवस्थितान् दृष्ट्वा धार्तराष्ट्रान्कपिध्वजः। प्रवृत्ते शस्त्रसंपाते धनुरुद्यम्य पाण्डवः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ >हे महीपते धृतराष्ट्र अब शस्त्रोंके चलनेकी तैयारी हो ही रही थी कि उस समय अन्यायपूर्वक राज्यको धारण करनेवाले राजाओं और उनके साथियोंको व्यवस्थितरूपसे सामने खड़े हुए देखकर कपिध्वज पाण्डुपुत्र अर्जुनने अपना गाण्डीव धनुष उठा लिया और अन्तर्यामी भगवान् श्रीकृष्णसे ये वचन बोले। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-19 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – नवदशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-19 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – नवदशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्।sa ghosho dhaartaraashtraanaan hrdayaani vyadaarayat Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016File Size:285 Time Duration:00:16 View In English Lyrics स घोषो धार्तराष्ट्राणां हृदयानि व्यदारयत्। नभश्च पृथिवीं चैव तुमुलो व्यनुनादयन्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ पाण्डवसेनाके शंखोंके उस भयंकर शब्दने आकाश और पृथ्वीको भी गुँजाते हुए अन्यायपूर्वक राज्य हड़पनेवाले दुर्योधन आदिके हृदय विदीर्ण कर दिये। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-18 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – अष्टादशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-18 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – अष्टादशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते।drupad draupadeyaashch sarvashah prthiveepati Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:277Kb:Time Duration:00:15   ViewIn English Lyrics द्रुपदो द्रौपदेयाश्च सर्वशः पृथिवीपते। सौभद्रश्च महाबाहुः शङ्खान्दध्मुः पृथक्पृथक्।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे राजन् श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि? राजा द्रुपद और द्रौपदीके पाँचों पुत्र तथा लम्बीलम्बी भुजाओंवाले सुभद्रापुत्र अभिमन्यु इन सभीने सब ओरसे अलगअलग (अपनेअपने) शंख बजाये। ...
Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-17 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – सप्तदशन् श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-6 Shlok-17 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक षष्टम अध्याय – सप्तदशन् श्लोक ॥

गीता श्लोक
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER6SHLOK #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name:काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः।kaash yashch parameshvaasah shikhandee ch mahaarath Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size:263Kb Time Duration:00:15 ViewIn EnglishLyrics काश्यश्च परमेष्वासः शिखण्डी च महारथः। धृष्टद्युम्नो विराटश्च सात्यकिश्चापराजितः।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ हे राजन् श्रेष्ठ धनुषवाले काशिराज और महारथी शिखण्डी तथा धृष्टद्युम्न एवं राजा विराट और अजेय सात्यकि? राजा द्रुपद और द्रौपदीके पाँचों पुत्र तथा लम्बीलम्बी भुजाओंवाले सुभद्रापुत्र अभिमन्यु इन सभीने सब ओरसे अलगअलग (अपनेअपने) शंख बजाये। ...