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Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-28 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – अष्टाविंशति श्लोक ॥

Shrimad Bhagwad Geeta Shlok Chapter-5 Shlok-28 ॥ श्रीमदभगवदगीता श्लोक पंचम अध्याय – अष्टाविंशति श्लोक ॥

गीता श्लोक - Geeta Shlok's With Hindi Meaning
#BHAKTIGAANE #MAHABHARATSHLOK #MAHAKAVYASHLOK #CHAPTER5SHLOK28 #GEETASHLOK #GEETAUPDESH #BHAGWATSHLOK #KRISHNAUPDESH Geeta Shlok/Lyrics Name : यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ॥ yatendriyamanobuddhirmunirmokshaparaayanah . vigatechchhaabhayakrodho yah sada mukt ev sah . Album Name : Shrimad Bhgwad Geeta Mahakavya Published Year : 2016 File Size : 69 Kb Time Duration : 0:17 Min View In English Lyrics यतेन्द्रियमनोबुद्धिर्मुनिर्मोक्षपरायणः । विगतेच्छाभयक्रोधो यः सदा मुक्त एव सः ।।5.28।। ॥ श्लोक का अर्थ ॥ ।।5.27 5.28।। बाह्य पदार्थों को बाहर ही छोड़ कर और नेत्रों की दृष्टि को भौंहों के बीच में स्थित करके तथा नासिका में विचरने वाले प्राण और अपान वायु को सम करके जिसकी इन्द्रियाँ मन और बुद्धि अपने वश में हैं जो मोक्ष परा...